संवाद शास्त्र (Samvad Shastra) Self-Help
संवाद शास्त्र (Samvad Shastra) Self-Help
Format : Paperback
Writer : Dr. Ashish Dwivedi
Pages : 208
ISBN : 9789393486141
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इन दिनों ज़िंदगी में जिस तरह से शब्दों की ‘कट-पेस्ट’ और विचारों की ‘असेंबलिंग ‘ चल रही है। भावनाएं मशीनी होती जा रही हैं। मैसेज भी अहसास के ‘ लाइनलॉस ‘ के चलते प्रभाव नहीं छोड़ पा रहा हैं । रिश्ते बेजान हो रहे हैं। अर्थी की तरह ढोये जा रहे हैं। तो ‘ भावों को व्यक्त ‘ ना कर पाने या ‘ एक-दूसरे को ठीक से कम्युनिकेट ‘ ना कर पाने के इस मर्ज के सामने संवाद कला की वैक्सीन की ज़रूरत है। बल्कि तत्काल कोटे में लाए जाने की ज़रूरत है। आशीष जी ने इस मायने में बहुत जबरदस्त काम किया है। वे ना सिर्फ़ तत्काल कोटे में इस किताब को ले आए हैं बल्कि ‘बात न पहुंचा पाना’ ‘ बहुत कुछ अव्यक्त रह जाना ‘ …जैसी पीड़ा के ख़िलाफ़ बहुत मारक और सार्थक सूत्र लाने में भी सफ़ल रहे हैं। निश्चित तौर पर इसमें बहुत शोध, श्रम और समय लगा होगा। उनकी जीवट ही ऐसी है कि एक बार ठान लेने के बाद सार्थक रचने से पीछे नहीं हटते हैं। मुझे इस किताब से गुजरने का मौका मिला। संवाद कला को लेकर कई तरह की गलतफहमियां दूर हुईं। एक नया नजरिया मिला। बह्म वाक्य जैसी बातें दिखाई दीं। अमृत मंथन के सार रूप में एक बात समझ में आई ‘ यदि आप बेहतर श्रोता हैं तो आप बेहतरीन वक्ता बन सकते हैं! ‘
