{"product_id":"हास्य-व्यंग्य-के-विविध-रंग-hasya-vyangya-ke-vividh-rang-humor-satire","title":"हास्य-व्यंग्य के विविध रंग (Hasya-Vyangya Ke Vividh Rang) Humor, Satire","description":"\u003cp\u003e\u003cspan\u003eहास्यरस प्रधान कविताएं सैकड़ों वर्षों से लिखी जा रही हैं । आजकल हास्य-कवि सम्मेलन सर्वाधिक लोकप्रिय हैं । आज का मनुष्य इसी के अभाव में जीता है । वह इतना व्यस्त तथा त्रस्त है कि उसके पास हँसने का समय ही नहीं है । हास्यरस के कवियों ने जहाँ विकृति देखी है उसी को लक्ष्य बनाकर कविता रच डाली है । तुलसीदास हो या सूरदास, बिहारी हों या अलीमुहीब खाँ 'प्रीतम'—हास्यरस की कविताएं सभी न लिखी हैं । किसी ने दुष्टों पर लिखा है तो किसी ने कंजूसों पर, किसी ने भ्रष्ट नेताओं को अपना शिकार बनाया है तो किसी ने दलबदल की प्रवृति को अपना लक्ष्य बनाया है । भ्रष्टाचारी अफसर, मुनाफाखोर व्यापारी, रिश्वत, मिलावट, तस्करी, कुर्सीमोह- कहने का तात्पर्य ये है कि हास्यकवियों की निगाह से कोई बच नहीं पाया । यह संकलन उन व्यक्तियों तथा प्रवृतियों का सिलसिलेवार 'एलबम' है जो हास्यरस के कवियों की चपेट में आए हैं और जिनकी पोल समय- समय पर खोली गई हैं। यह आलम्बन कोश इन्हें असंगतियों पर व्यंग्यबाण चलाने वाली हास्य-व्यंग्य की कविताओं का प्रथम संग्रह हैं, जो मनोरंजन के साथ-साथ हास्य-काव्य का इतिहास भी प्रस्तुत करता है ।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"संपादन : बरसानेलाल चतुर्वेदी","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":48274378784935,"sku":null,"price":140.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0745\/2131\/3447\/files\/vividh.png?v=1774771923","url":"https:\/\/amarsatyaprakashan.com\/products\/%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a7-%e0%a4%b0%e0%a4%82%e0%a4%97-hasya-vyangya-ke-vividh-rang-humor-satire","provider":"अमरसत्य","version":"1.0","type":"link"}