{"product_id":"हरिशंकर-परसाई-व्यंग्य-समय-harishankar-parsai-satire","title":"हरिशंकर परसाई : व्यंग्य समय (Harishankar Parsai : Vyangya Samay) Satire","description":"\u003cp\u003e\u003cspan\u003eहरिशंकर परसाई हिंदी व्यंग्य के शीर्ष रचनाकार के रूप में व्यापक स्वीकृति प्राप्त कर चुके हैं। कथा साहित्य में जो स्थान मुंशी प्रेमचंद का है, व्यंग्य साहित्य में वही प्रतिष्ठा परसाई की है। व्यंग्य को उन्होंने ‘विधिवत विधा’ के रूप में अंगीकार किया। अन्यान्य विधाओं के बीच व्यंग्य ने जो अकूत यश प्राप्त किया है उसके मूल में परसाई का बहुविधा लेखन ही है। व्यंग्य लेखन के लिए अनिवार्य विशेषताएं उनके व्यक्तित्व में सहज विद्यमान थीं, अपने अनुभव-अध्ययन और अपनी अंतर्दृष्टि से उन्होंने विशेषताओं को क्षमता में रूपांतरित किया। आज यह देखकर किसी को आश्चर्य हो सकता है परसाई ने तत्कालीन राजनीति का कितना सघन व तार्किक विश्लेषण अपने लेखन में किया है। राजनीति, समाज, धर्म, संस्कृति, अर्थ आदि के भीतरी स्याह- सफेद का जितना बोध परसाई को था वह बहुत कम लेखकों में संभव हुआ है।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"हरिशंकर परसाई","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":48220532506791,"sku":null,"price":350.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0745\/2131\/3447\/files\/hARI.png?v=1774499370","url":"https:\/\/amarsatyaprakashan.com\/products\/%e0%a4%b9%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%b6%e0%a4%82%e0%a4%95%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%88-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%af-harishankar-parsai-satire","provider":"अमरसत्य","version":"1.0","type":"link"}