{"product_id":"सहचर-है-समय-sahchar-hai-samay-autobiography","title":"सहचर है समय (Sahchar Hai Samay) Autobiography","description":"\u003cp\u003e\u003cspan\u003eसहचर है समय रामदरश मिश्र का समय को सहचर मानना प्रकारांतर से 'स्व' और 'समय' के संबंधों की द्वंद्वात्मकता और सामंजस्य की ओर संकेत करता है । इस आत्मवृत्त से एक ओर कछार के अंचल में बीते बचपन से लेकर वाराणसी में उच्च शिक्षा, जीविका-संघर्ष, गुजरात-प्रवास, दिल्ली- आगमन, बहुआयामी रचनाशीलता और दिल्ली के साहित्यिक परिवेश से जुड़े मार्मिक प्रसंगों का जुलूस उमड़ पड़ा है, दूसरी ओर इसी के समानांतर स्वतंत्रता-पूर्व का ग्रामीण परिवेश, स्वतंत्रता और जनतांत्रिक आकांक्षाएँ, व्यवस्था के अंतर्विरोध, अध्यापन-जगत की राजनीति, भारत-पाक युद्ध, आपातकाल, इंदिरा गाँधी का निधन, सिख-विरोधी हिंसा यानी कि पचास वर्षों का जीवंत इतिहास अपनी अनेक विशेषताओं और कुरूपताओं के साथ उभरा है ।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"रामदरश मिश्र","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":48197082677415,"sku":null,"price":600.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0745\/2131\/3447\/files\/sachar.png?v=1774424903","url":"https:\/\/amarsatyaprakashan.com\/products\/%e0%a4%b8%e0%a4%b9%e0%a4%9a%e0%a4%b0-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%af-sahchar-hai-samay-autobiography","provider":"अमरसत्य","version":"1.0","type":"link"}