{"product_id":"सरला-एक-विधवा-की-आत्मजीवनी-sarala-ek-vidhva-ki-aatmjivani-autobiography","title":"सरला : एक विधवा की आत्मजीवनी (Sarala : Ek Vidhva Ki Aatmjivani) Autobiography","description":"\u003cp\u003e\u003cspan\u003eसरला: एक विधवा की आत्मजीवनी हिंदी में किसी स्त्री के द्वारा आत्मकथा लिखने का पहला प्रयास है इसलिए ऐतिहासिक भी है। यह अपने आप में आश्चर्यजनक है कि वर्ष 1915-1916 के बाद इस क्षेत्र में एक लंबा अंतराल दिखाई देता है। इस आत्मजीवनी के पाठ के संदर्भ में यह जिक्र करना भी आवश्यक लगता है कि यह इक्कीसवीं सदी की किसी नारीवादी महिला की आत्माकथा नहीं है बल्कि एक सामान्य स्त्री की आपबीती है। तत्कालीन समय और समाज में यह बात ही अपने आप में नई है कि कोई विधवा स्त्री अपनी और अपने जैसों की पीड़ा के बारे में सोचती है, न सिर्फ सोचती है बल्कि लिखकर उस पीड़ा को समाज के सामने उजागर करने का साहस करती है। इस आत्मजीवनी में लेखिका के निजी जीवन से जुड़े वह हिस्से हैं जो जीवन के एक खंड की कथा के रूप में तत्कालीन सामाजिक परिदृश्य में स्त्रियों से जुड़ी अनेक सामाजिक समस्याओं को उभारकर सामने ले आते हैं। -प्रज्ञा पाठक\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"प्रज्ञा पाठक","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":48304976887975,"sku":null,"price":110.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0745\/2131\/3447\/files\/niz_1.png?v=1775105555","url":"https:\/\/amarsatyaprakashan.com\/products\/%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a7%e0%a4%b5%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%86%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%b5%e0%a4%a8%e0%a5%80-sarala-ek-vidhva-ki-aatmjivani-autobiography","provider":"अमरसत्य","version":"1.0","type":"link"}