{"product_id":"रहिमन-धागा-प्रेम-का-rahiman-dhaga-prem-ka-stories-in-hindi","title":"रहिमन धागा प्रेम का (Rahiman Dhaga Prem Ka) Stories in Hindi","description":"\u003cp\u003e\u003cspan\u003e“पापा, अगर आप सोच रहे है कि जल्दी ही मुझसे पीछा छुडा लेंगे तो आप गलत सोच रहे है । मैं अभी दस-बीस साल शादी करने के मूड में नहीं हूँ। मैं आपके साथ आपके घर में रहूंगी । इसलिए यह घर हमारे लिए बहुत छोटा है । प्लीज़, कोई दूसरा बड़ा-सा देखिए।” “तुम शादी भी करोगी और मेरे घर में भी रहोगी, उसके लिए मैं आजकल एक बड़ा-सा घर और एक अच्छा सा घर-जमाई खोज रहा हूँ। रही इस घर की, तो यह तुम्हारी माँ के लिए है । यह जब चाहे यहीं शिफ्ट हो सकती है । शर्त एक ही है-कविराज इस घर में नहीं आएंगे और तुम्हारी माँ के बाद इस घर पर तुम्हारा अधिकार होगा ।” अंजू का मन कृतज्ञता स भर उठा । उसने पुलकित स्वर में पूछा, “तो पापा, आपने माँ को माफ कर दिया ?” “इसमें माफ करने का सवाल कहाँ आता है ? अग्नि को साक्षी मानकर चार भले आदमियों के सामने मैंने उसका हाथ थामा था, उसके सुख-दुःख का जिम्मा लिया था । जब उसने अपना सुख बाहर तलाशना चाहा, मैंने उसे मनचाही आज़ादी दे दी । अब तुम कह रही हो कि वह दुखी है तो उसके लौटने का मार्ग भी प्रशस्त कर दिया । उसके भरण-पोषण का भार मुझ पर था । गुजारा-भत्ता तो दे ही रहा हूँ अब सिर पर यह छत भी दे दी।” [इसी संग्रह की कहानी “रहिमन धागा प्रेम का’ से]\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"मालती जोशी","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":48227327836327,"sku":null,"price":120.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0745\/2131\/3447\/files\/rahiman_3.png?v=1774513961","url":"https:\/\/amarsatyaprakashan.com\/products\/%e0%a4%b0%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%ae%e0%a4%a8-%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%97%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%ae-%e0%a4%95%e0%a4%be-rahiman-dhaga-prem-ka-stories-in-hindi","provider":"अमरसत्य","version":"1.0","type":"link"}