{"product_id":"योगक्षेम-yogkshem-nove-in-hindi","title":"योगक्षेम (Yogkshem) Nove in Hindi","description":"\u003cp\u003e\u003cspan\u003eकाफी विचार करने के उपरान्त मैंने गीता को उपन्यास के रूप में प्रस्तुत करने का निर्णय लिया । इस सम्बन्ध में अनेक विद्वानों के साथ विचार-विमर्श किया । कुछ ने मेरे विचार की सराहना की तो कुछ ने यह कहते हुए कि गीता स्वयं ही एक उपन्यास है, मेरे विचार को नकार दिया । कुछ का मत था कि विचार तो उचित है, किन्तु रचना में मौलिकता का अभाव रहने का खतरा है। समझाया उनका आशय गीता के मूलपाठ की सुरक्षा से था । गीता के मूलपाठ के साथ यदि छेड़छाड़ की गई तो उसका मूल स्वरूप ही नष्ट हो जाएगा और यदि मूलपाठ के साथ छेड़छाड़ नहीं की तो उपन्यास में मौलिकता का अभाव रहने की पूरी सम्भावना है । इस प्रकार यह मौलिक कृति नहीं कहलाएगी । उनकी आशंका अपने स्थान पर उचित थी किन्तु मेरे लिए चुनौती । चुनौती स्वीकारते हुए मैंने गीता पर आधारित उपन्यास ही लिखने का अन्तिम निर्णय लिया । -  लेखक\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"राजेन्द्र त्यागी","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":48502559473831,"sku":null,"price":400.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0745\/2131\/3447\/files\/yogkshem.png?v=1776397906","url":"https:\/\/amarsatyaprakashan.com\/products\/%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%97%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a5%87%e0%a4%ae-yogkshem-nove-in-hindi","provider":"अमरसत्य","version":"1.0","type":"link"}