{"product_id":"मनोहर-श्याम-जोशी-व्यंग्य-समय-manohar-shyam-joshi-vyangya-samay-satire","title":"मनोहर श्याम जोशी : व्यंग्य समय (Manohar Shyam Joshi : Vyangya Samay) Satire","description":"\u003cp\u003e\u003cspan\u003eमनोहर श्याम जोशी के व्यंग्य बोध का दायरा बड़ा है। उनका अध्ययन बहुआयामी था इसलिए सोच, सरोकार, संरचना का विशेष रूप उनकी रचनाओं में दिखता है। कथाकार और पत्रकार की क्षमताओं से उनका व्यंग्यकार समृद्ध हुआ है। …यह भी कह सकते हैं कि व्यंग्य की अपूर्व समझ ने उनके कथा साहित्य को अभूतपूर्व बना दिया है। मनोहर श्याम जोशी अपने कथागुरु अमृतलाल नागर की तरह स्वभाव से ही व्यंग्य विशारद थे। किसी भी रचना में किस तरह की व्यंजनाओं की गुंजाइश है, यह जोशी अच्छी तरह जानते थे। इसीलिए उनके उपन्यास बताते हैं कि बिना व्यंग्यधर्मिता के इनकी रचना असंभव थी। मनुष्य के भीतर लुके-छिपे, भलाई-बुराई करते, गिरते-उठते, बनते-मिटते मनुष्य को उद्घाटित करते हुए जोशी रचनाशीलता के कई प्रतिमान रच डालते हैं। उन्होंने व्यंग्य को यांत्रिक ढंग से न परखा, न विकसित किया।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"मनोहर श्याम जोशी","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":48223792496807,"sku":null,"price":325.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0745\/2131\/3447\/files\/manohar.png?v=1774507132","url":"https:\/\/amarsatyaprakashan.com\/products\/%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a5%8b%e0%a4%b9%e0%a4%b0-%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%9c%e0%a5%8b%e0%a4%b6%e0%a5%80-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%af-manohar-shyam-joshi-vyangya-samay-satire","provider":"अमरसत्य","version":"1.0","type":"link"}