{"product_id":"पारिजात-parijat-novel-in-hindi","title":"पारिजात (Parijat) Novel in Hindi","description":"\u003cp\u003e\u003cstrong\u003eसाहित्य अकादमी से पुरस्कृत उपन्यास\u003c\/strong\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cspan\u003e‘पारिजात’ केवल एक वृक्ष, कथा और विश्वास मात्र नहीं है, बल्कि यथार्थ की धरती पर लिखी एक ऐसी तमन्ना है, जो रोहन के ख़ून में रेशा-रेशा बनकर उतरी है और रूही के श्वासों में ख़्वाब बनकर घुल गई है। उपन्यास में ‘पारिजात’ एक रूपक नहीं, वह दरअसल नए-पुराने रिश्तों की दास्तान है। उपन्यास की कथावस्तु में इतिहास कहीं किरदार बनकर उभरता है तो कहीं वर्तमान और अतीत के बीच सूत्रधार की भूमिका निभाता नज़र आता है। उसकी इस आवा-जाही में उपन्यास के पात्र कभी तारीख़ से गुरेज़ाँ नज़र आते हैं तो कभी उसको तलाश करते हुए खुद अपनी खोज में लग जाते हैं। उनकी इस कोशिश में बहुत-से संदर्भ, शख़्सियतें, घटनाएँ चाहे-अनचाहे अपना आकार ग्रहण कर लेती हैं और समय विशेष पर पड़ी धूल को अपनी उपस्थिति से ख़ारिज कर एक नई स्मित की तरफ़ ले जाती हैं, जहाँ पर दुनियावी भाग-दौड़ के बीच रिश्तों की बहाली की जद्दोजहद अपनी सारी ख़ूबसूरती और ऊर्जा के साथ मौजूद है। कहा जा सकता है कि नासिरा शर्मा का यह उपन्यास उनकी अभी तक की सृजनात्मकता का निचोड़ है, जिसमें उनके विचार, बयान, भाषा, संवेदना और सरोकार बहुत संजीदा और धारदार बनकर उभरे हैं। क़िस्सागोई का पुराना फन उन्हें बख़ूबी आता है। अलिफ़-लैला की दास्ताँगो शहरज़ाद की तरह लेखिका इनसानी संवेदनाओं के तहख़ानों, रिश्तों के गलियारों और देशकाल के पेचीदा रास्तों से गुज़ारती हुई पाठक को उन चरित्रों के मन की गहरी थाह लेने में न केवल मददगार साबित होती हैं, बल्कि क़िस्से के अंत तक पहुँचते-पहुँचते यह रचना उनके दिलों में रिश्तों की अहमियत का जज़्बा भी उभारती है। समय के इस दौर में ‘पारिजात’ उपन्यास को पढ़ना एक उपलब्धि ही मानी जाएगी।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"नासिरा शर्मा","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":48181961359527,"sku":null,"price":550.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0745\/2131\/3447\/files\/Partijat.png?v=1774240828","url":"https:\/\/amarsatyaprakashan.com\/products\/%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a4-parijat-novel-in-hindi","provider":"अमरसत्य","version":"1.0","type":"link"}