{"product_id":"नीलेश-रघुवंशी-कवि-ने-कहा-neelesh-raghuvanshi-kavi-ne-kaha-poems","title":"नीलेश रघुवंशी : कवि ने कहा \/ Neelesh Raghuvanshi : Kavi Ne kaha (Poems)","description":"\u003cp\u003e\u003cspan\u003eजीने की उष्मा और ललक से भरी ये कविताएँ समकालीन कविता में नीलेश की नई पहचान को रेखांकित करती हैं। ‘पहली रुलाई तक की डायरी’ जैविक स्त्री-बोध का क्रमिक दस्तावेज है, जो शायद हिंदी में पहली बार इतनी प्रामाणिकता के साथ दर्ज हुआ है। इस काव्यात्मक डायरी को जो बात सबसे अधिक विश्वसनीय बनाती है, वह अजन्मे शिशु के साथ माँ की वह चुहल है, जो प्रायः इसके हर टुकड़े में मिल जाएगी। ‘जन्म देना एक यातना से गुजरना है’µइस पंक्ति को लिखने वाली यह कवयित्री ही यह क्रीड़ाभरी पंक्ति भी लिख सकती हैµ‘मैं लिख रही हूँ डायरी और तुम बंदर बने हुए होµतुमने तो मेरे पेट को खेल का मैदान बना रखा है।’ जन्म देने के सर्जनात्मक उल्लास से भरी ये कविताएँ समकालीन कविता में कुछ नया जोड़ती हैं। -केदारनाथ सिंह\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"नीलेश रघुवंशी","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":48182368305319,"sku":null,"price":195.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0745\/2131\/3447\/files\/anamika.png?v=1774249029","url":"https:\/\/amarsatyaprakashan.com\/products\/%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%b2%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%b0%e0%a4%98%e0%a5%81%e0%a4%b5%e0%a4%82%e0%a4%b6%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%b5%e0%a4%bf-%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a4%b9%e0%a4%be-neelesh-raghuvanshi-kavi-ne-kaha-poems","provider":"अमरसत्य","version":"1.0","type":"link"}