{"product_id":"जकड़न-jakdan-novel-in-hindi","title":"जकड़न (Jakdan) Novel in Hindi","description":"\u003cdiv\u003e\u003cspan\u003eपुलिस अफसर ने काफी सहनशील ढंग से और सहानुभूति-भरी नजर से एक बार देखा। विनय के साहित्य में पुलिस कितनी क्रूर, कुटिल, निर्मम है, लेकिन अभी उनको पुलिस से कितना सदभावपूर्ण व्यवहार मिल रहा है। हालाँकि बउआ की माँ ने कहा था—तुम लोगों के घर की बात है, इसीलिए इतना कुछ हो पा रहा है बहू जी ! हम लोगों के लिए होता  ? कितना कुछ घटा, लेकिन मुएथा ने सुना कभी? अफसर कहता है, मुझे लगता है इसलिए कह रहा हूँ मैं सरकारी तौर पर नहीं कह रहा हूँ, ऐसा लगता है कि उनमें किसी बात पर झगडा हो रहा होगा, अचानक गुस्से में आकर एक पीतल की ऐश ट्रै फेंककर मारी, वह जाकर नस पर लगी, उससे आपकी बेटी बेहोश होक रगिर पडी, उसके बाद... [ इस उपन्यास से]\u003c\/span\u003e\u003c\/div\u003e","brand":"महाश्वेता देवी","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":48757085798567,"sku":null,"price":110.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0745\/2131\/3447\/files\/jakdan.png?v=1776840452","url":"https:\/\/amarsatyaprakashan.com\/products\/%e0%a4%9c%e0%a4%95%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a4%a8-jakdan-novel-in-hindi","provider":"अमरसत्य","version":"1.0","type":"link"}