{"title":"S. L. Bhyrappa (एस० एल० भैरप्पा)","description":"","products":[{"product_id":"उत्तर-कांड-uttar-kand-novel","title":"उत्तर कांड (Uttar Kand) Novel","description":"\u003cp\u003e\u003cspan\u003eवाल्मीकि के ‘रामायण’ का अध्ययन करते समय हमें चरित्रों को दृष्टि से, चरित्र-चित्रण की दृष्टि से, घटनाओं की स्वाभाविकता की दृष्टि से, वर्णनों के औचित्य की दृष्टि से और चरित्रों के मनोवैज्ञानिक विश्लेषण की दृष्टि से जो कमियाँ नज़र आती हैं, उन सभी का समाधान उत्तर कांड नामक इस उपन्यास में मिलता है। जैसा कि “पर्व” में किया गया था, “उत्तर कांड’ में भी चरित्रों और घटनाओं को मिथकीकरण से मुक्त करके, स्वाभाविक परिवेश में प्रस्तुत कर दिया गया है। इसलिए इसको आधुनिक गद्य-महाकाव्य होने की प्रतिष्ठा भी मिली है। इसमें आश्चर्य की कोई बात नहीं है कि (कन्नड् में) एक ही साल में इसकी तेरह आवृत्तियाँ और आज तक अट्ठारह आवृत्तियाँ प्रकाशित हुई हैं और इसके हिंदी, अंग्रेज़ी तथा मराठी अनुवाद भी प्रकाशित हो चले हैं।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"एस० एल० भैरप्पा","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":48171307172007,"sku":null,"price":500.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0745\/2131\/3447\/files\/uttar.png?v=1774078751"},{"product_id":"सार्थ-saarth-novel-in-hindi","title":"सार्थ (Saarth) Novel in Hindi","description":"\u003cp\u003e\u003cspan\u003eसार्थ अर्थात् व्यापारियों का काफिला । नागभट्ट नामक एक वैदिक अपने राजा द्वारा एक सार्थ के साथ उच्च अध्ययन के लिए भेजा जाता है । कथा के वाचक नागभट्ट द्वारा आठवीं शती के भारत का जीवंत चित्र प्रस्तुत किया गया है । उस समय वैदिक धर्म पतनोन्मुख था, भले ही शकरचार्य, कुमारिल भट्ट, मंडन मिश्र, भारती देवी आदि जैसी विभूतियां उसके प्रचार-प्रसार में लगी थीं। दूसरी ओर बौद्ध धर्म अपने उत्कर्ष पर था । उसके आचार्य धर्म-प्रचार के लिए स्तूपों, चैत्यों और विहारों के निर्माण में जुटे थे । साथ ही, योग साधना और तंत्र साधना में भी आकर्षण बना हुआ था । भारत के पूर्वी भाग में इस्लाम धर्म तलवार की नोक से अपने धर्म और संस्कृति की लकीर खींच रहा था। डॉ. भैरप्पा ने तत्कालीन समाज और धर्म का सजीव चित्रण अपनी पैनी लेखनी से अपनी विशिष्ट शैली में इस उपन्यास में किया है । संभवत: साधारण जन उस समय भी ऊहापोह की उसी स्थिति में था, जिसमें आज अपने को पा रहा है । इसी कारण पाठक इस उपन्यास को एक बार प्रारंभ करके छोड़ नहीं पाएगा, जब तक कि इसे समाप्त न कर ले । डॉ. भैरप्पा की यह विशिष्ट ऐतिहासिक कृति 'सार्थ' अब आपके सन्मुख प्रस्तुत है ।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"एस एल भैरप्पा","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":48273374675111,"sku":null,"price":425.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0745\/2131\/3447\/files\/Saarth.png?v=1774763928"},{"product_id":"वंश-वृक्ष-vansh-vriksh-novel-in-hindi","title":"वंश वृक्ष (Vansh Vriksh) Novel in Hindi","description":"\u003cp\u003e\u003cspan\u003e विख्यात उपन्यासकार भैरप्पा ने प्रस्तुत उपन्यास में वंशावली के आदि और जटिल प्रश्नों पर आधारित जिस गहन एवं मर्मस्पर्शी कथा का ताना-बाना बुना है, वह भारतीय मनीषा की प्रश्नाकुलता की ऊर्जा है और हमारी वंशीय परंपरा का राग-अनुराग एवं विराग भी। जीवन के लिए निर्धारित लक्ष्यों को अर्जित कर लेना, अपने ‘वंश’ को आगे बढ़ाने का स्वस्थ संकेत है, अथवा संतति के माध्यम से ही वंशीय परंपरा का वहन सहज संभव हो सकता है—अपने उपलक्ष्य में यह कृति इन प्रश्नों से जूझती है। वंशजों के रक्त-संबंधों की शुचिता की आशंकाएं तथा सरोकार भी इस कथा में जहां-तहां तैरते हुए नए भावबोध और अवधारणाओं से हमारा सामना कराते हैं। एक अंचल विशेष का वर्णन होते हुए भी यह कृति अखिल भारतीय या कहें कि वैश्विक मनोजगत् की प्रतिनिधि रचना है जो जीवन के संबंधों, संयोगों और सहभावों से संरचित है। जीवनगत निर्णयों के उद्दाम स्रोतों से प्रस्फुटित कई जीवनलीलाओं के तटों को निर्धारित और ध्वस्त करती इस कथा में लेखक के द्वंद्वों को स्वर देने का काम उसके नायक करते हैं तथा मानो यह सब घटित होते हैं पाठक के साथ। कृति, कृतिकार और पाठक के त्रिकोण का यह अंतरंग संबंध ‘वंशवृक्ष’ की एक अन्य तथा अन्यतम उपलब्धि है।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"एस एल भैरप्पा","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":48273492574375,"sku":null,"price":315.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0745\/2131\/3447\/files\/vansh.png?v=1774764695"},{"product_id":"आवरण-aavaran-novel-in-hindi","title":"आवरण (Aavaran) Novel in Hindi","description":"\u003cdiv\u003e\n\u003cp\u003e'आवरण'  एक अत्यधिक चर्चित और विवादास्पद उपन्यास है, जो भारतीय इतिहास के पुनर्लेखन और ऐतिहासिक अत्याचारों पर पर्दा डालने के विमर्श पर केंद्रित है।  लक्ष्मी नामक एक स्वतंत्र विचारों वाली हिंदू महिला एक मुस्लिम पुरुष से शादी करती है, लेकिन बाद में उसे अत्याचार, विश्वासघात और इस्लाम में जबरन धर्मांतरण का सामना करना पड़ता है। अंत में वह अपने सच को वापस पाने की यात्रा पर निकलती है। यह उपन्यास बताता है कि कैसे तथाकथित धर्मनिरपेक्ष-उदारवादी इतिहासकार भारत के सच्चे इतिहास को छिपाते हैं। पुस्तक में मुगलों द्वारा हिंदू मंदिरों के विध्वंस और अन्य अत्याचारों को तर्कों के साथ प्रस्तुत किया गया है। इसके सीधे और कड़वे लेखन के कारण, कई लोगों ने इसकी आलोचना भी की है, लेकिन यह अपनी लोकप्रियता के कारण यह उपन्यास बार-बार पुनर्मुद्रित किया गया। भैराप्पा इस उपन्यास के माध्यम से यह संदेश देते हैं कि सामाजिक सद्भाव झूठी धारणाओं पर नहीं, बल्कि ऐतिहासिक सच्चाई को स्वीकार करने पर आधारित होना चाहिए। \u003c\/p\u003e\n\u003c\/div\u003e","brand":"एस० एल० भैरप्पा","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":48391948959911,"sku":null,"price":450.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0745\/2131\/3447\/files\/ramakant_1.png?v=1775961849"},{"product_id":"भित्ति-bhitti-autobiography","title":"भित्ति (Bhitti) Autobiography","description":"\u003cp\u003e\u003cspan class=\"T286Pc\" data-sfc-cp=\"\" data-sfc-root=\"c\" data-sfc-cb=\"\" data-processed=\"true\"\u003e\u003cspan\u003eएस० एल० भैरप्पा की आत्मकथा। \u003c\/span\u003e\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cdiv\u003e\u003cspan\u003eपेशे से प्राध्यापक होते हुए भी, प्रवृत्ति से साहित्यकार बने रहने वाले भैरप्पा ऐसी गरीबी से उभरकर आए हैं जिसकी कल्पना तक कर पाना कठिन है। इनका जीवन सचमुच ही संघर्ष का जीवन रहा। हुब्बल्लि के काडसिद्धेश्वर कॉलेज में अध्यापक की हैसियत से कैरियर शुरू करके इन्होने आगे चलकर गुजरात के सरदार पटेल विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के एन-सी-ई-आर-टी- तथा मैसूर के प्रादेशिक शिक्षा कॉलेज में सेवा की । \u003c\/span\u003e\u003c\/div\u003e\n\u003cp\u003e\u003cspan class=\"T286Pc\" data-sfc-cp=\"\" data-sfc-root=\"c\" data-sfc-cb=\"\" data-processed=\"true\"\u003eयह पुस्तक उनके लेखक बनने के सफर और भारतीय साहित्य में योगदान को दर्शाती है। \u003c\/span\u003e\u003cspan class=\"T286Pc\" data-sfc-cp=\"\" data-sfc-root=\"c\" data-sfc-cb=\"\" data-processed=\"true\"\u003eयह डॉ. भैराप्पा द्वारा जीवन में अपनाई गई नैतिक और व्यक्तिगत मूल्यों का विस्तृत विवरण है।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"एस० एल० भैरप्पा","offers":[{"title":"Default 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Title","offer_id":48578422669479,"sku":null,"price":400.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0745\/2131\/3447\/files\/chhor.png?v=1776532634"},{"product_id":"जिज्ञासा-jigyasa-novel-in-hindi","title":"जिज्ञासा (Jigyasa) Novel in Hindi","description":"\u003cp\u003e\u003cspan\u003eउत्कंठा को भड़काने वाला डॉ० भैरप्पा जी का जिज्ञासा उपन्यास एक बेजोड़ रचना है। उपन्यास के आरंभ से लेकर अंत तक एक ऐसे कथा-नायक की जीवनी के प्रति जिज्ञासा बनी रहती है जो मंच पर स्वयं बिरले ही दिखाई पड़ता है। सारे उपन्यास में उस परोक्ष कथा-नायक विश्वनाथ की जीवनी के अन्वेषण का ताना-बाना यों सशक्त तकनीक से प्रस्तुत किया गया है कि जिसके माध्यम से उपन्यास के अन्य पात्र भी अपने निजी जीवन का विश्लेषण करने के लिए विवश हो जाते हैं। विश्वनाथ अपने आप में एक पहेली-सा बना हुआ, अपनी अस्मिता की खोज में भटकता हुआ और अन्य पात्रों की कुंठाओं को कुरेदते हुए आगे निकल जाता रहता है। जिज्ञासा की विशेषता यह है कि विश्वनाथ की जीवनी से उलझे हुए पात्रों में स्वयं पाठक भी अपना कोई धूमिल-सा चेहरा पहचानने की चेष्टा अपने आप करने लगता है। विश्वनाथ की जीवनी के बहुमुखी झरोखे से झाँकने की उत्कंठा पाठक में बराबर बनी रहती है और उसे पहचानने की जिज्ञासा कभी शांत नहीं होती। विश्वनाथ की अस्मिता पाठक के मन पर अपना स्थायी प्रभाव छोड़ जाती है। \u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"एस० एल० भैरप्पा","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":48578674032807,"sku":null,"price":200.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0745\/2131\/3447\/files\/Jigyasa.png?v=1776533175"},{"product_id":"आधार-aadhar-novel-in-hindi","title":"आधार (Aadhar) Novel in Hindi","description":"\u003cp\u003e\u003cspan\u003eयह उपन्यास जीवन की सार्थकता, मानवीय संबंधों, नैतिकता और मृत्यु के बाद के अनुभवों (गरुड़ पुराण के संदर्भ में) पर गहराई से विचार करता है। \u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cspan\u003eएक 60 वर्षीय अविवाहित व्यक्ति अपने करीबी दोस्त की मृत्यु के बाद उसके अंतिम संस्कार में जाता है। वहां के लोगों और अपनी यादों के माध्यम से वह अपने जीवन, रिश्तों और अस्तित्व के अर्थ पर विचार करता है।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"एस० एल० भैरप्पा","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":48579000860839,"sku":null,"price":150.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0745\/2131\/3447\/files\/aadhar.png?v=1776533758"}],"url":"https:\/\/amarsatyaprakashan.com\/collections\/s-l-bhyrappa-%e0%a4%8f%e0%a4%b8%e0%a5%a6-%e0%a4%8f%e0%a4%b2%e0%a5%a6-%e0%a4%ad%e0%a5%88%e0%a4%b0%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%aa%e0%a4%be.oembed","provider":"अमरसत्य","version":"1.0","type":"link"}