{"title":"बेस्टसेलर","description":"","products":[{"product_id":"बोल-री-कठपुतली-bol-ri-kathputli-stories-in-hindi","title":"बोल री कठपुतली (Bol Ri Kathputli) Stories in Hindi","description":"\u003cp\u003e\u003cspan\u003eभारतीय नारी हमेशा ही लेखकों का प्रिय विषय रही है। मध्य युग की नारी का इतिहास शोषण-अनाचार और अत्याचार का इतिहास है। पुरुष की ‘पाशविक बर्बरता की कहानी है। आधुनिक काल में चित्र कुछ बदला तो है। शिक्षा के प्रसार ने इतना तो किया है कि नारी को अपने प्रति होने वाले अन्यास की चेतना दी है। अपनी पीड़ा को मुखर करने की क्षमता दी है, पर फिर भी औरत आज भी दर्द और आँसुओं की तस्वीर है। नई चेतना ने उसके मानसिक क्षितिज को विस्तार तो दिया है, पर उसके पैर अब भी रसोई की चौखट में कैद हैं। उसकी आकांक्षाओं को पंख तो मिल गए हैं, परंतु परिवार की लक्ष्मण रेखा अब भी उसका मार्ग अवरुद्ध किए हुए है। मजबूरी में ही सही, हमने बेटी की, बहू की कमाई खाना शुरू किया था। पर अब तो उसका स्वाद ऐसा लग गया है कि हम अपने स्वार्थ के आगे उसकी सुख-सुविधा, आशा-आकांक्षाओं को भी भूल गए हैं। वह हमारे लिए पैसा कमाने वाली मशीन-भर रह गई है। उसकी कमाई पर हमारा हक है। पर उसके अधिकारों को लेकर हम अब भी मध्य युग की नीतियाँ अपना रहे हैं। मैंने समाज में व्याप्त इन्हीं विसंगतियों को अपनी कहानियों में पिरोने का प्रयत्न किया है। -मालती जोशी\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"मालती जोशी","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":48165596594343,"sku":null,"price":200.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0745\/2131\/3447\/files\/aspweb_2.png?v=1773996559"},{"product_id":"तुम्हारे-लिए-tumhare-liye-a-novel-in-hindi","title":"तुम्हारे लिए (Tumhare Liye) A Novel in Hindi","description":"\u003cp class=\"cvGsUA direction-ltr align-center para-style-body\"\u003e\u003cspan class=\"a_GcMg font-feature-liga-off font-feature-clig-off font-feature-calt-off text-decoration-none text-strikethrough-none\"\u003eनैनीताल की धुंध, झील की खामोशी और पहाड़ों में दबा एक अनकहा प्रेम—\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp class=\"cvGsUA direction-ltr align-center para-style-body\"\u003e\u003cspan class=\"a_GcMg font-feature-liga-off font-feature-clig-off font-feature-calt-off text-decoration-none text-strikethrough-none\"\u003e“तुम्हारे लिए”\u003c\/span\u003e\u003cspan class=\"a_GcMg font-feature-liga-off font-feature-clig-off font-feature-calt-off text-decoration-none text-strikethrough-none\"\u003e प्रेम के मिलने की नहीं, उसे जी न पाने की कहानी है।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp class=\"cvGsUA direction-ltr align-center para-style-body\"\u003e\u003cspan class=\"a_GcMg font-feature-liga-off font-feature-clig-off font-feature-calt-off text-decoration-none text-strikethrough-none\"\u003eगुरु–शिष्या के रिश्ते से शुरू होकर यह कथा ऐसे प्रेम में बदलती है, जो शब्दों में नहीं, त्याग और मौन में जिया जाता है। समय, दूरी और गलत फैसले इस प्रेम को ऐसा अधूरापन देते हैं जो पाठक के भीतर तक उतर जाता है।\u003c\/span\u003e\u003cspan class=\"a_GcMg font-feature-liga-off font-feature-clig-off font-feature-calt-off text-decoration-none text-strikethrough-none white-space-prewrap\"\u003e \u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp class=\"cvGsUA direction-ltr align-center para-style-body\"\u003e\u003cspan class=\"a_GcMg font-feature-liga-off font-feature-clig-off font-feature-calt-off text-decoration-none text-strikethrough-none\"\u003eयह कहानी उम्मीद जगाकर उसे तोड़ती है— और इसी टूटन में अपनी अमरता पाती है। नब्बे के दशक में दूरदर्शन पर धारावाहिक के रूप में प्रसारित यह कृति आज भी उतनी ही जीवित, उतनी ही मार्मिक और उतनी ही प्रासंगिक है। \u003c\/span\u003e\u003cspan class=\"a_GcMg font-feature-liga-off font-feature-clig-off font-feature-calt-off text-decoration-none text-strikethrough-none\"\u003e“तुम्हारे लिए”\u003c\/span\u003e\u003cspan class=\"a_GcMg font-feature-liga-off font-feature-clig-off font-feature-calt-off text-decoration-none text-strikethrough-none\"\u003e आज के युवाओं के लिए भी उतना ही सच्चा सवाल है—क्या हम अपने डर के कारण अपने सबसे कीमती रिश्ते खो रहे हैं?\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Himanshu Joshi","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":48170955505831,"sku":null,"price":300.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0745\/2131\/3447\/files\/tumhareliye.png?v=1774072561"},{"product_id":"आर्य-ऋग्वेद-और-भारतीय-सभ्यता-arya-rigved-or-bhartiya-sabhyta","title":"आर्य, ऋग्वेद और भारतीय सभ्यता (Arya, Rigved or Bhartiya Sabhyta)","description":"\u003cp\u003e\u003cspan\u003eऋग्वेद भारतीय संस्कृति, धर्म और सभ्यता, प्रकारान्तर से कहें तो हिन्दू संस्कृति, धर्म और दर्शन की पीठिका है। भारत आर्यों की मूलभूमि है, इस सत्य को झुठलाने की बहुत कोशिशें होती रही हैं। ‘आर्य, ऋग्वेद और भारतीय सभ्यता’ में ऋग्वेद के हर अंग की विस्तृत मीमांसा की गई है। ऋग्वेद विश्व का प्राचीनतम ग्रन्थ है। प्राचीनतम होते हुए भी इसकी सर्वांगीण पूर्णता और हर दृष्टि से सर्वोत्तमता को देखते हुए ऋग्वेद को अपौरुषेय भी माना जाता रहा है। अपौरुषेय मानने के पीछे धार्मिक कारण भी रहा हो सकता है। जो भी हो पर इसे मानवी मेधा की ही रचना कहना ठीक होगा। प्रस्तुत पुस्तक में ऋग्वेदिक संस्कृति और सभ्यता के नैरन्तर्य को दिखाया गया है। भारतीय समाज के ताने-बाने का जो ढाँचा आज है, वह ऋग्वेद से लेकर सिन्धु-सरस्वती सभ्यता से होता हुआ वर्तमान काल तक आया है। चाहे वह पारिवारिक और सामाजिक जीवन को दर्शाने वाला रूप हो या धार्मिक आस्था और विश्वास की मान्यता हो, या दार्शनिक चिन्तन-मनन की परम्परा हो, उन सभी के मूल में ऋग्वेद ही है। ऋग्वेद आर्यों के महान् और विलक्षण सांस्कृतिक ऋक्थ का प्राचीनतम और सर्वाधिक प्रामाणिक ग्रन्थ है। वह न केवल हिन्दू दर्शन, धर्म और पारिवारिक, सामाजिक तथा शासकीय व्यवस्था को दर्शाने वाला आदि ग्रन्थ है बल्कि विश्व के प्राचीनतम और उत्कृष्टतम काव्य का गान भी है।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"कृपाशंकर सिंह","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":48171134124199,"sku":null,"price":800.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0745\/2131\/3447\/files\/arya_1.png?v=1774762864"},{"product_id":"मेरी-इक्यावन-कविताएं-meri-ekyavan-kavitayen-poems","title":"मेरी इक्यावन कविताएं (Meri Ekyavan Kavitayen) Poems","description":"\u003cp\u003e\u003cspan\u003eवज्र से भी कठोर अडिग संकल्प-सम्पन्न राजनेता श्री अटल बिहारी वाजपेयी के कुसुम कोमल हृदय से उमड़ पड़ने वाली कविताएँ गिरि-हृदय से फूट निकलने वाली निर्झरियों के सदृश एक ओर जहाँ अपने दुर्दान्त आवेग से किसी भी अवगाहनकर्ता को बहा ले जाने में समर्थ हैं, वहीं दूसरी ओर वे अपनी निर्मलता, शीतलता और प्राणवत्ता से जीवन के दुर्गम पथ के राहियों की प्यास और थकान को हरकर नई प्रेरणा की संजीवनी प्रदान करने की क्षमता से भी सम्पन्न हैं। इनका सहज स्वर तो देशभक्तिपूर्ण शौर्य का ही है; किन्तु कभी-कभी नव सर्जना की वेदना से ओतप्रोत करुणा की रागिनी को भी ये ध्वनित करती हैं। -विष्णुकान्त शास्त्री\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"अटल बिहारी वाजपेयी","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":48171166138535,"sku":null,"price":315.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0745\/2131\/3447\/files\/atal.png?v=1774076176"},{"product_id":"दिल्ली-delhi-novel-in-hindi","title":"दिल्ली (Delhi) Novel in Hindi","description":"\u003cp\u003e\u003cspan\u003eउपन्यास का नाम शहर के नाम से ! जी हाँ, यह दिल्ली की कहानी है। छह सौ साल पहले से लेकर आज तक की । खुशवंत सिंह की अनुभवी कलम ने इतिहास के ढाँचे को अपनी रसिक कल्पना की शिराओं और मांस-मज्जा से भरा। यह शुरू होती है सन् 1265 के ग़यासुद्दीन बलबन के शासनकाल से । तैमूर लंग, नादिरशाह, मीर तक़ी मीर, औरंगज़ेब, अमीर खुसरो, बहादुर शाह ज़फ़र आदि के प्रसंगों के साथ कहानी आधुनिक काल की दिल्ली तक पहुँचती है कैसे हुआ नयी दिल्ली का निर्माण ! और अंत होता है 1984 के दंगों के अवसानमय परिदृश्य में ! कहानी का नायक–मुख्य वाचक है, दिल्ली को तहेदिल से चाहने वाला एक व्यभिचारी किस्म का चरित्र, जिसकी प्रेयसी भागमती कोई रूपगर्विता रईसज़ादी नहीं, वरन् एक कुरूप हिंजड़ा है। दिल्ली और भागमती दोनों से ही । नायक को समान रूप से प्यार है। देश-विदेश के सैर-सपाटों के बाद जिस तरह वह बार-बार अपनी चहेती दिल्ली के पास लौट-लौट आता है, वैसे ही देशी-विदेशी औरतों के साथ खाक छानने के बाद वह फिर-फिर अपनी भागमती के लिए बेकरार हो उठता है। तेल चुपड़े बालों वाली, चेचक के दागों से भरे चेहरे वाली, पान से पीले पड़े दाँतों वाली भागमती के वास्तविक सौंदर्य को उसके साथ बिताए अंतरंग क्षणों में ही देखा-महसूसा जा सकता है। यही बात दिल्ली के साथ भी है। भागमती और दिल्ली दोनों ही ज़ाहिलों के हाथों रौंदी जाती रहीं। भागमती को उसके गँवार ग्राहकों ने रौंदा, दिल्ली को बार-बार उजाड़ा विदेशी लुटेरों और आततायियों के आक्रमणों ने। भागमती की तरह दिल्ली भी बाँझ की बाँझ ही रही ।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"खुशवंत सिंह","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":48182278881447,"sku":null,"price":450.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0745\/2131\/3447\/files\/Delhi_1.png?v=1774247241"},{"product_id":"मेरे-मित्र-कुछ-महिलाएं-कुछ-पुरुष-mere-mitra-kuchh-mahilayen-kuchh-purush-memoir","title":"मेरे मित्र : कुछ महिलाएं कुछ पुरुष (Mere Mitra : Kuchh Mahilayen Kuchh Purush) Memoir","description":"\u003cp\u003e\u003cspan\u003eप्रस्तुत पुस्तक के विषय-व्यक्तित्व मैंने बिना कसी तरतीब के चुने है । इनमें भी वे महिलाएँ और पुरुष विशेष है, जिनसे कि 60 और 70 के दशकों में मेरी दोस्ती हुई । अपने बारे में मेरे इन उद्गारों को पाकर कुछ तो इतने नाराज हुए कि उनसे बोलचाल ही बंद हो गई, पर कुछ खुश भी हुए । उन्होंने माना के उनके प्रति मैंने अपने स्नेह का ही इजहार किया है । कुछ ऐसे भी है, जिन्होंने अपने बारे में मेरे लिखे को पढ़ने की जहमत उठाना भी गवारा नहीं किया और कहा कि मैं उनके बारे में चाहे जो सोचता रहूँ उससे उन्हें कोई लेना-देना नहीं है । पर अब आप ही बताएं कि उनके बारे में मेरा यह लिखना किसी काम का है या नहीं । -खुशवंत सिंह\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"खुशवंत सिंह","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":48195689971879,"sku":null,"price":200.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0745\/2131\/3447\/files\/meremitra_1.png?v=1774415962"},{"product_id":"हरिशंकर-परसाई-व्यंग्य-समय-harishankar-parsai-satire","title":"हरिशंकर परसाई : व्यंग्य समय (Harishankar Parsai : Vyangya Samay) Satire","description":"\u003cp\u003e\u003cspan\u003eहरिशंकर परसाई हिंदी व्यंग्य के शीर्ष रचनाकार के रूप में व्यापक स्वीकृति प्राप्त कर चुके हैं। कथा साहित्य में जो स्थान मुंशी प्रेमचंद का है, व्यंग्य साहित्य में वही प्रतिष्ठा परसाई की है। व्यंग्य को उन्होंने ‘विधिवत विधा’ के रूप में अंगीकार किया। अन्यान्य विधाओं के बीच व्यंग्य ने जो अकूत यश प्राप्त किया है उसके मूल में परसाई का बहुविधा लेखन ही है। व्यंग्य लेखन के लिए अनिवार्य विशेषताएं उनके व्यक्तित्व में सहज विद्यमान थीं, अपने अनुभव-अध्ययन और अपनी अंतर्दृष्टि से उन्होंने विशेषताओं को क्षमता में रूपांतरित किया। आज यह देखकर किसी को आश्चर्य हो सकता है परसाई ने तत्कालीन राजनीति का कितना सघन व तार्किक विश्लेषण अपने लेखन में किया है। राजनीति, समाज, धर्म, संस्कृति, अर्थ आदि के भीतरी स्याह- सफेद का जितना बोध परसाई को था वह बहुत कम लेखकों में संभव हुआ है।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"हरिशंकर परसाई","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":48220532506791,"sku":null,"price":350.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0745\/2131\/3447\/files\/hARI.png?v=1774499370"},{"product_id":"संवाद-शास्त्र-samvad-shastra-self-help","title":"संवाद शास्त्र (Samvad Shastra) Self-Help","description":"\u003cp\u003e\u003cspan\u003eइन दिनों ज़िंदगी में जिस तरह से शब्दों की ‘कट-पेस्ट’ और विचारों की ‘असेंबलिंग ‘ चल रही है। भावनाएं मशीनी होती जा रही हैं। मैसेज भी अहसास के ‘ लाइनलॉस ‘ के चलते प्रभाव नहीं छोड़ पा रहा हैं । रिश्ते बेजान हो रहे हैं। अर्थी की तरह ढोये जा रहे हैं। तो ‘ भावों को व्यक्त ‘ ना कर पाने या ‘ एक-दूसरे को ठीक से कम्युनिकेट ‘ ना कर पाने के इस मर्ज के सामने संवाद कला की वैक्सीन की ज़रूरत है। बल्कि तत्काल कोटे में लाए जाने की ज़रूरत है। आशीष जी ने इस मायने में बहुत जबरदस्त काम किया है। वे ना सिर्फ़ तत्काल कोटे में इस किताब को ले आए हैं बल्कि ‘बात न पहुंचा पाना’ ‘ बहुत कुछ अव्यक्त रह जाना ‘ …जैसी पीड़ा के ख़िलाफ़ बहुत मारक और सार्थक सूत्र लाने में भी सफ़ल रहे हैं। निश्चित तौर पर इसमें बहुत शोध, श्रम और समय लगा होगा। उनकी जीवट ही ऐसी है कि एक बार ठान लेने के बाद सार्थक रचने से पीछे नहीं हटते हैं। मुझे इस किताब से गुजरने का मौका मिला। संवाद कला को लेकर कई तरह की गलतफहमियां दूर हुईं। एक नया नजरिया मिला। बह्म वाक्य जैसी बातें दिखाई दीं। अमृत मंथन के सार रूप में एक बात समझ में आई ‘ यदि आप बेहतर श्रोता हैं तो आप बेहतरीन वक्ता बन सकते हैं! ‘\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"डॉ० आशीष द्विवेदी","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":48225892499623,"sku":null,"price":350.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0745\/2131\/3447\/files\/samvad.png?v=1774510954"},{"product_id":"चरित्रहीन-charitraheen-novel-in-hindi","title":"चरित्रहीन (Charitraheen) Novel in Hindi","description":"\u003cp\u003e\u003cspan\u003eबाँग्ला के अमर कथाशिल्पी शरत्चन्द्र चट्टोपाध्याय प्रायः सभी भारतीय भाषाओं में पढ़े जाने वाले शीर्षस्थ उपन्यासकार हैं। उनके कथा-साहित्य की प्रस्तुति जिस रूप-स्वरूप में भी हुई, लोकप्रियता के तत्त्व ने उसके पाठकीय आस्वाद में वृद्धि ही की। सम्भवतः वह अकेले ऐसे भारतीय कथाकार भी हैं, जिनकी अधिकांश कालजयी कृतियों पर फिल्में बनीं तथा अनेक धारावाहिक सीरियल भी। ‘देवदास’, ‘चरित्राहीन’ और ‘श्रीकान्त’ के साथ तो यह बारम्बार घटित हुआ है। अपने विपुल लेखन के माध्यम से शरत् बाबू ने मनुष्य को उसकी मर्यादा सौंपी और समाज की उन तथाकथित ‘परम्पराओं’ को ध्वस्त किया, जिनके अन्तर्गत नारी की आँखें अनिच्छित आँसुओं से हमेशा छलछलाई रहती हैं। समाज द्वारा अनसुनी रह गई वंचितों की बिलख-चीख और आर्तनाद को उन्होंने परखा तथा गहरे पैठकर यह जाना कि जाति, वंश और धर्म आदि के नाम पर एक बड़े वर्ग को मनुष्य की श्रेणी से ही अपदस्थ किया जा रहा है। इस षड्यन्त्र के अन्तर्गत पनप रही तथाकथित सामाजिक ‘आम सहमति’ पर उन्होंने अपने लेखन के माध्यम से रचनात्मक हस्तक्षेप किया, जिसके चलते वह लाखों-करोड़ों पाठकों के चहेते शब्दकार बने। नारी और अन्य शोषित समाजों के धूसर जीवन का उन्होंने चित्राण ही नहीं किया, बल्कि उनके आम जीवन में आच्छादित इन्द्रधनुषी रंगों की छटा भी बिखेरी। प्रेम को आध्यात्मिकता तक ले जाने में शरत् का विरल योगदान है। शरत्-साहित्य आम आदमी के जीवन को जीवंत करने में सहायक जड़ी-बूटी सिद्ध हुआ है। हिन्दी के एक विनम्र प्रकाशक होने के नाते हमारा यह उत्तरदायित्व बनता ही था कि शरत्-साहित्य को उसके मूलतम ‘पाठ’ के अन्तर्गत अलंकृत करके पाठकों को सौंप सकें, अतः अब यह प्रस्तुति आपके हाथों में है। हमारा प्रयास रहेगा कि किताबघर प्रकाशन द्वारा प्रकाशित और प्रकाश्य शरत्-साहित्य को सर्वांग तथा सर्वश्रेष्ठ होने का प्रमाणपत्र आप जैसे सुधी पाठकों द्वारा ही जारी किया जाए।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":48244419723431,"sku":null,"price":300.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0745\/2131\/3447\/files\/charitra.png?v=1774596372"},{"product_id":"टोबा-टेकसिंह-तथा-अन्य-कहानियां-toba-teksingh-tatha-anya-kahaniyan-stories-in-hindi","title":"टोबा टेकसिंह तथा अन्य कहानियां (Toba Teksingh Tatha Anya Kahaniyan) Stories in Hindi","description":"","brand":"मंटो","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":48245120139431,"sku":null,"price":200.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0745\/2131\/3447\/files\/toba.png?v=1774600060"},{"product_id":"रसीदी-टिकट-rasidi-ticket-autobiography","title":"रसीदी टिकट (Rasidi Ticket) Autobiography of Amrita Pritam","description":"\u003cdiv\u003e\n\u003cspan class=\"gmail-T286Pc\"\u003eमशहूर लेखिका \u003c\/span\u003e\u003cspan class=\"gmail-T286Pc\"\u003eअमृता प्रीतम की\u003c\/span\u003e\u003cspan\u003e आत्मकथा। \u003c\/span\u003e\n\u003c\/div\u003e\n\u003cdiv\u003e\u003cspan\u003eयह पुस्तक प्रेम, जुदाई, विभाजन की त्रासदी और एक लेखक के रूप में उनके अनुभवों को बयां करती है\u003c\/span\u003e\u003c\/div\u003e\n\u003cdiv\u003e\u003cspan\u003eअमृता प्रीतम ने अपनी आत्मकथा में लिखा है कि लोग उन्हें एक 'रसीदी टिकट' जितना छोटा समझते थे, जिसे किसी कागज़ पर चिपकाकर कहीं भी भेजा जा सकता 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धर्मांतरण का सामना करना पड़ता है। अंत में वह अपने सच को वापस पाने की यात्रा पर निकलती है। यह उपन्यास बताता है कि कैसे तथाकथित धर्मनिरपेक्ष-उदारवादी इतिहासकार भारत के सच्चे इतिहास को छिपाते हैं। पुस्तक में मुगलों द्वारा हिंदू मंदिरों के विध्वंस और अन्य अत्याचारों को तर्कों के साथ प्रस्तुत किया गया है। इसके सीधे और कड़वे लेखन के कारण, कई लोगों ने इसकी आलोचना भी की है, लेकिन यह अपनी लोकप्रियता के कारण यह उपन्यास बार-बार पुनर्मुद्रित किया गया। भैराप्पा इस उपन्यास के माध्यम से यह संदेश देते हैं कि सामाजिक सद्भाव झूठी धारणाओं पर नहीं, बल्कि ऐतिहासिक सच्चाई को स्वीकार करने पर आधारित होना चाहिए। \u003c\/p\u003e\n\u003c\/div\u003e","brand":"एस० एल० भैरप्पा","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":48391948959911,"sku":null,"price":450.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0745\/2131\/3447\/files\/ramakant_1.png?v=1775961849"},{"product_id":"नोबेल-पुरस्कार-विजेताओं-की-51-कहानियाँ-nobel-puraskar-vijetaon-ki-51-kahaniyan-stories-in-hindi","title":"नोबेल पुरस्कार विजेताओं की 51 कहानियाँ (Nobel Puraskar Vijetaon Ki 51 Kahaniyan) Stories in Hindi","description":"\u003cp\u003e\u003cspan\u003eसाहित्य के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार की महत्ता सर्व-स्वीकृत है, क्योंकि यह किसी एक व्यक्ति का नहीं, एक राष्ट्र का सम्मान होता है। साहित्य के क्षेत्र में सन् 1901 से 2005 तक 98 पुरस्कार दिए जा चुके हैं और पुरस्कृत साहित्यकारों में कवि भी हैं, कथाकार भी, दार्शनिक भी हैं और इतिहासकार भी। लेकिन मेरी यह निश्चित धारणा है कि इन रचनाकारों में जो कथाकार रहे हैं, उन्होंने पूरे विश्व पर अपना एक अलग प्रभाव छोड़ा है और उनकी कथाकृतियाँ सर्वाधिक चर्चित, प्रशंसित होती रही हैं। इस पुस्तक में यह प्रयास है कि इन कथाकारों की कुछ श्रेष्ठ कहानियाँ एक साथ उपलब्ध हो सकें। इन कहानियों को पढ़ने के बाद सहज ही यह अनुमान लगाया जा सकता है कि विश्व के इन श्रेष्ठ और समर्थ रचनाकारों के पास कैसी वैचारिक दृष्टि या रचना-शैली थी या है। और यह भी अनोखी बात इन कहानियों के माध्यम से हमारे सामने आती है कि अलग-अलग देशों के अलग-अलग रचनाकारों की वैचारिक दृष्टि भले ही अलग हो, किंतु मानवीय संवेदनाओं के, मूल्यों के, जीवन के प्रति गहरी आस्था और विकास के वे एक जैसे पक्षधर हैं और शायद यही इनकी श्रेष्ठता का कारण है, मापदंड है। इस पुस्तक की अनिवार्यता और महत्ता को मैं इसी दृष्टि से स्वीकारता हूँ और शायद आप भी स्वीकारेंगे।- संपादक\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"संपादक - सुरेन्द्र तिवारी","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":48392255275175,"sku":null,"price":550.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0745\/2131\/3447\/files\/nobel_1.png?v=1775967852"},{"product_id":"प्यार-बोत्सवाना-की-बारिश-जैसा-है-pyar-botswana-ki-baarish-jaisa-hai-stories-in-hindi","title":"प्यार बोत्सवाना की बारिश जैसा है (Pyar Botswana Ki Baarish Jaisa Hai) Stories in Hindi","description":"\u003cp\u003e\u003cspan\u003e‘प्यार बोत्सवाना की बारिश जैसा है’ अत्यंत संवेदनशील अफ्रीकी कहानियों का हिंदी अनुवाद है। अनुवाद और संपादन उर्मिला जैन ने किया है। वे देशी और विदेशी साहित्य की मर्मज्ञ हैं। पाठक के रूप में जिन रचनाओं ने उनके हृदय को छुआ उन्हें व्यापक पाठक वर्ग के लिए वे इस संकलन में प्रस्तुत कर रही हैं। अनूदित रचनाओं की लोकप्रियता के बावजूद हिंदी में अफ्रीकी कहानियां बहुत कम उपलब्ध हैं। विश्व का यह भाग अपनी संघर्षपूर्ण अभिव्यक्ति के लिए रेखांकित किया जाता है। केन्या, गांबिया, गिनी, नाइज़ीरिया, सेनेगल, बोत्सवाना आदि की रचनाशीलता से उर्मिला जैन ने बारह कहानियां चुनी हैं। ये कहानियां बताती हैं कि भाषा, देश, पहनावा, आचार, परंपरा आदि की भिन्नताओं के बाद भी मूलभूत समस्याएं और संवेदनाएं तो एक जैसी हैं। अभाव, उपेक्षा, गुलामी, अपमान, निराशा से हर जगह मनुष्य जूझ रहा है। व्यक्ति के भीतर छिपे पाखंड भी हर स्थान पर लगभग समान हैं। संकलन की शीर्षक कहानी के वाक्य हैं, ‘मैंने अपनी पोशाक सावधानी से चुनी थी। अपने भय को सम्मानित रूप में ढका था।’ अनुवाद करते समय उर्मिला जैन ने मूल भाषा के प्रवाह और आशय को भली-भांति संप्रेषित किया है। ‘काली लड़की’ कहानी की डिऔआना का संताप इन पंक्तियों में प्रकट हुआ है, ‘उस रात उसने अपना सूटकेस खोला। उसके अंदर की चीजों को देखा और रोई। किसी ने परवाह नहीं की। फिर भी वह उसी प्रवाह में बहती रही और दूसरों से वैसे ही दूर रही जैसे उसके गांव कासामांस में समुद्र किनारे घोंघे पड़े रहते हैं।’ अपनी प्रखर कथाभूमि और मार्मिक अभिव्यक्ति के कारण ये कहानियां पाठकों को खूब अच्छी लगेंगी। ऐसा लगेगा जैसे वे अपने ही समाज या देश का वृत्तांत पढ़ रहे हैं। ये रचनाएं विचार और संवेदना के वैश्विक सूत्र प्रदान करती हैं।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"संपादन एवं अनुवाद : उर्मिला जैन","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":48651334484135,"sku":null,"price":300.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0745\/2131\/3447\/files\/botswana.png?v=1776660032"},{"product_id":"डिजिटल-मीडिया-हैंडबुक-digital-media-handbook","title":"डिजिटल मीडिया : हैंडबुक (Digital Media : Handbook)","description":"\u003cp\u003e\u003cspan\u003eयह पुस्तक उन सभी के लिए है, जो किसी भी रूप में डिजिटल मीडिया व सोशल मीडिया से जुड़े हुए हैं। वे चाहे कोई वेबसाइट चलाते हों, यू-ट्यूबर हों, रील बनाते हों, ब्लॉगर हों, अपना पेज लिखते हों, पॉडकास्टर हों, ऑनलाइन न्यूज़ पोर्टल संचालित करते हों, या किसी भी तरह के कंटेंट क्रिएटर हों, या फिर डिजिटल मीडिया व सोशल मीडिया के आम उपयोगकर्ता ही क्यों न हों। यह पुस्तक सभी के लिए बहुत उपयोगी है, क्योंकि डिजिटल मीडिया व सोशल मीडिया की दुनिया में क्या करना है, क्या नहीं करना है, क्या कर सकते हैं, क्या नहीं कर सकते हैं, संचालकों से लेकर आम उपयोगकर्ताओं तक के अधिकार क्या-क्या हैं, कर्तव्य क्या-क्या हैं, इन तमाम पहलुओं के मद्देनज़र नियम क्या-क्या हैं, कानून क्या-क्या हैं, सरकारी दिशा निर्देश क्या-क्या हैं? ऐसी ही अनेक जिज्ञासाओं का सहज-सरल समाधान है यह पुस्तक। वे लोग, जो ऑनलाइन न्यूज़ पोर्टल चलाते हैं या चलाना चाहते हैं, उनके लिए तो यह पुस्तक बेहद जरूरी है। ऑनलाइन पत्रकारिता में रुचि रखनेवालों के लिए और किसी न किसी रूप में पत्रकारिता से जुड़े हुए लोगों-यथा पत्रकारिता के विद्यार्थी, प्रतियोगी परीक्षाओं के परीक्षार्थी, शोधार्थी, अध्यापक, आम पाठक, दर्शक व श्रोता, हर किसी के लिए यह बहुत काम की पुस्तक है। प्रशिक्षु पत्रकार, अप्रशिक्षित पत्रकार, सिटिजन जर्नलिस्ट (नागरिक पत्रकार) व नए डिजिटल पत्रकारों के लिए तो यह पुस्तक विशेष रूप से उपयोगी है।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"इरफ़ान-ए-आज़म","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":48657887559847,"sku":null,"price":350.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0745\/2131\/3447\/files\/digital.png?v=1776671180"},{"product_id":"महायात्रा-गाथा-4-खंड-mahayatra-gatha-4-vols-historical-fiction-bestseller","title":"‘महायात्रा गाथा’ (4 खंड ) \/ Mahayatra Gatha ( 4 Vols.) Historical Fiction, Bestseller","description":"\u003cp\u003e\u003cspan\u003e‘महायात्रा गाथा’ मानव इतिहास की उस दीर्घ यात्रा को प्रस्तुत करती है, जिसकी शुरुआत प्रागैतिहासिक काल से मानी जाती है—लगभग 5000 ई.पू. से भी पहले, जब मानव ने प्रकृति के बीच अपना अस्तित्व गढ़ना शुरू किया।\u003c\/span\u003e\u003cbr\u003e\u003cspan\u003eइन्द्र से मांधाता (5500 ई.पू. से 3500 ई.पू.) और मांधाता से जनमेजय (3500 ई.पू. से 1500 ई.पू.) तक की यात्रा मानव सभ्यता के प्रारंभिक विकास, संघर्ष और सामाजिक संरचना को दर्शाती है।\u003c\/span\u003e\u003cbr\u003e\u003cspan\u003eजनमेजय से अजातशत्रु (1500 ई.पू. से 600 ई.पू.) और फिर अजातशत्रु से हर्षवर्धन (600 ई.पू. से 700 ई.) तक आते-आते इतिहास अधिक स्पष्ट और संगठित रूप लेने लगता है।\u003c\/span\u003e\u003cbr\u003e\u003cspan\u003eहर्षवर्धन से पृथ्वीराज चौहान (700 ई. से 1200 ई.) तक का काल भारतीय संस्कृति, राजनीति और युद्धों के उत्कर्ष का प्रतीक है।\u003c\/span\u003e\u003cbr\u003e\u003cspan\u003eयह संपूर्ण यात्रा केवल घटनाओं का वर्णन नहीं, बल्कि मनुष्य के बौद्धिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास का जीवंत चित्रण है।\u003c\/span\u003e\u003cbr\u003e\u003cspan\u003eरांगेय राघव ने इस कृति में इतिहास को केवल तथ्य नहीं, बल्कि एक प्रवाहमान कथा के रूप में प्रस्तुत किया है।\u003c\/span\u003e\u003cbr\u003e\u003cspan\u003eइस प्रकार ‘महायात्रा गाथा’ मानव सभ्यता के उद्भव से लेकर उसके उत्कर्ष तक की कालजयी ऐतिहासिक गाथा बन जाती है।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"रांगेय राघव","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":48965398855847,"sku":null,"price":1450.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0745\/2131\/3447\/files\/maha-1fb.png?v=1777184963"},{"product_id":"अर्द्धनारीश्वर-ardhnarishwar-novel-in-hindi-a-sahitya-akademi-award-winning-novel","title":"अर्द्धनारीश्वर (Ardhnarishwar) Novel in Hindi \/ A Sahitya Akademi Award-Winning Novel","description":"\u003cp\u003e\u003cspan\u003e‘अर्द्धनारीश्वर ‘ व्यक्तिमन, समाजमन एवं अंतर्मन के विविध स्तरों पर नारी और नर थे इन्हीं के एकमएक सुर और स्वर-मिलन की प्राप्ति का प्रयास है यह उपन्यास । वही जाति-पाति और धर्म को समस्या, वही विवाह, तलाक, बलात्कार की समस्या, वही नारी-शोषण, उत्पीडन, वही टूटते-बिखरतें जीवन की कहानी, किन्तु मुक्ति के लिए ‘कोई तो’ की प्रतीक्षा नहीं है । यहीं लेखक ने समाधान के रूप में एक वृहत्तर रूपरेखा की सर्जना की है । ‘अर्द्धनारीश्वर ‘ का अभिप्रेत नारी और नर की समान सहभागिता को प्राप्त करना है । इसके लिए जरूरी है, एक-दूसरे को अपनी-अपनी दुर्बलताओं व सबलताओं के साथ स्वीकार करना तथा मान लेना कि रचना के लिए प्रकृति व पुरुष का मिलन भी जरूरी है । मूल समस्या तो पुरुष की है, उसके पौरुषिक अहम् की, जो उसे ‘बेचारा’ बना देती है । सहज तो इसे ही बनाना है । इसी की असहजता से स्त्री बहुत-से बंधन तोड़कर आगे निकल आई है । लेकिन बंधनहीन होकर किसी उच्छ्रंखल को रचना करना लेखक का अभिप्रेत नहीं है, बल्कि बंधनो की जकड़न को समाप्त कर प्रत्येक सुर को उसका यथोचित स्थान देकर जीवन-राग का निर्माण करना है । अजित के शब्दों में लेखक कहता है : “मैं सुमिता को अपनी दासता से मुक्त कर दूँगा । मैं उसकी दासता से मुक्त हो जाऊँगा। तभी हम सचमुच पति-पत्नी हो सकेंगे।” इसी स्वयं की दासता से मुक्ति का नाम है, ‘अर्द्धनारीश्वर’।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"विष्णु प्रभाकर","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":50130399690919,"sku":null,"price":575.0,"currency_code":"INR","in_stock":false}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0745\/2131\/3447\/files\/ardh.png?v=1779421674"}],"url":"https:\/\/amarsatyaprakashan.com\/collections\/%e0%a4%a8%e0%a4%b5%e0%a5%80%e0%a4%a8%e0%a4%a4%e0%a4%ae-%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%95%e0%a5%87%e0%a4%82.oembed","provider":"अमरसत्य","version":"1.0","type":"link"}