{"title":"धर्म, दर्शन एवं संस्कृति (Religion, Philosophy and Culture)","description":"","products":[{"product_id":"भारतीय-संस्कृति-और-हिंदी-प्रदेश-2-खंड-bhartiya-sanskriti-or-hindi-pradesh-2-vols-culture","title":"भारतीय संस्कृति और हिंदी-प्रदेश (2 खंड) \/ Bhartiya Sanskriti or Hindi Pradesh (2 Vols.) Culture","description":"\u003cp\u003e \u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cspan\u003e\u003cimg src=\"https:\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0745\/2131\/3447\/files\/ram1.jpg?v=1775193561\" alt=\"\" width=\"131\" height=\"131\"\u003e\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eरामविलास शर्मा\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cspan\u003eमहाभारत और रामायण में सभागारों और बड़े-बड़े भवनों का वर्णन है । वे हड़प्पा सभ्यता के अवशेषों में प्रत्यक्ष है । पाटलिपुत्र एक बड़े साम्राज्य की राजधानी बना । वहां के भवन चीनी यात्री फाहियान ने देखे तो उसने सीधा, ये मनुष्यों के नहीं, देवों के बनाए हुए होंगे । पाटलिपुत्र, काशी, मथुरा और उज्जयिनी, ये भारत के प्राचीन नगर थे । आज भी ये संसार के ऐसे प्राचीनतम नगर हैं, जिनका इतिहास अब तक अटूट चला आ रहा है । भारतीय संस्कृति का बहुत गहरा संबंध इन चार महानगरों से है । इन नगरों पर ध्यान देते ही यह प्रचलित धारणा खंडित हो जाती है कि भारत ग्राम समाजों का देश है, यहाँ के लोग कला-कौशल में पिछडे हुए थे और हमें उन्हें ग्राम समाजों की ओर लौट जाना चाहिए । ये चारों महानगर विभिन्न युगों में व्यापारिक संबंधों से परस्पर जुड़े रहे हैं । इन्होंने दक्षिण जनपदों के मदुरै आदि नगरों से भी संबंध कायम किया था । मगध से मालवा तक अब जातीय भाषा के रूप में हिन्दी का व्यवहार होता है । नगरों के बिना हिन्दी का यह प्रसार भारत के सबसे बडे जातीय क्षेत्र में असंभव था । इन नगरों के द्वारा हिन्दी प्रदेश के जनपद प्राचीन काल से परस्पर संबद्ध हुए और दक्षिण भारत से उन्होंने अपना संबंध जोड़ा । इसलिए भारत राष्ट्र के निर्माण में और भारतीय संस्कृति के विकास में हिन्दी प्रदेश की निर्णायक भूमिका स्वीकार करनी चाहिए । दक्षिण में तमिलनाडु, उत्तर में कश्मीर, पूर्व में असम और पश्चिम में गुजरात, दूर-दूर के इन प्रदेशों को जोड़ने वाला, इनके बीच स्थित विशाल हिन्दी प्रदेश है । ऋग्वेद, अथर्ववेद, उपनिषद, महाभारत, रामायण, अर्थशास्त्र की रचना यहीं हुई । यहीं कालिदास और भवभूति ने अपने ग्रंथ रचे और मौर्य तथा गुप्त साम्राज्यों की आधारभूमि यही प्रदेश था । उत्तरकाल से दिल्ली, आगरा इस प्रदेश के बहुत बड़े नगर बने । ये व्यापार के बहुत बड़े केंद्र थे और सांस्कृतिक केंद्र भी थे । तुर्कवंशी राजाओं ने यहीं रहकर शताब्दियों तक एक बहुत बड़े राज्य का संचालन किया था । विद्यापति, कबीर, सूरदास, तुलसीदास जैसे कवि इसी क्षेत्र में हुए । इसी प्रदेश में प्रसिद्ध संगीतकार तानसेन का जन्म हुआ । अपने स्थापत्य सौन्दर्य से संसार को चकित कर देने वाला ताजमहल इसी प्रदेश के आगरा नगर में है । इसलिए इस पुस्तक का नाम भारतीय संस्कृति और हिन्दी-प्रदेश है ।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"रामविलास शर्मा","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":48314793623719,"sku":null,"price":2100.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0745\/2131\/3447\/files\/sanskriti_1.png?v=1775193361"},{"product_id":"सफल-व्यक्तित्व-के-हनुमान-मंत्र-safal-vyaktitva-ke-hanuman-mantra-self-help-religion","title":"सफल व्यक्तित्व के हनुमान मंत्र (Safal Vyaktitva Ke Hanuman Mantra (Self-help, Religion)","description":"\u003cp\u003e\u003cspan\u003eसफलता प्राप्त करने के लिए व्यक्ति में आत्मविश्वास, ज्ञान, अनुभव, विषय-विशेषज्ञता तथा विश्वसनीयता जैसे गुणों की आवश्यकता होती 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तत्त्वों का उद्गम स्थान होने से वेद के कुछ विशिष्ट निर्देश मंत्रों के भावार्थ का ही हमने इस पुस्तक में संग्रह किया है। इसके बाद ही, ऋषि-मुनि कृत उपनिषदों सहित 12 स्मृतियों में से विविध प्रकार के और बहुमूल्य नीति सिद्धांतों का विशेष रूप से संकलन किया गया है।\u003c\/p\u003e","brand":"आचार्य दीननाथसिद्धान्तालंकार","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":48315396653223,"sku":null,"price":400.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0745\/2131\/3447\/files\/neetiya.png?v=1775195364"},{"product_id":"रामकथा-की-नारियाँ-ramkatha-ki-nariyan","title":"रामकथा की नारियाँ (Ramkatha Ki Nariyan)","description":"\u003cp\u003e\u003cspan\u003e‘रामकथा की नारियाँ’, पुस्तक लिखने का विचार क्यों मन में आया जबकि वे सारे प्रसंग, सभी पात्रें के क्रिया-कलाप, घटनाओं के कारण और पात्रें के चरित्र सभी कुछ संपूर्ण संसार को पहले से ही ज्ञात है। मेरे विचार से भारत देश का कोई भी साधारण पढ़ा-लिखा मनुष्य जो अधिक या कम सामाजिक ज्ञानवान, विद्वान या अल्पज्ञानी, अत्यधिक अथवा अल्प अध्यात्मिक ज्ञान भी रखता हो और जिसने अनेक महान ग्रंथों, वेदों, उपनिषदों इत्यादि को न भी पढ़ रखा हो तथापि बड़े-बूढ़ों से सुनकर अथवा टेलीविजन पर ही रामायण और रामकथा को देखकर ही रामाख्यान का सम्यक ज्ञान तो अभी तक अवश्य ही प्राप्त कर लिया होगा, ऐसी मेरी धारणा है। फिर भी मुझे ऐसी प्रेरणा क्यों हुई और रामायणकालीन स्त्रियों के जीवन और उनके चरित्र के बारे में लिखने की क्या आवश्यकता महसूस हुई? किसी दैवीय प्रेरणा के कारण ही मेरे मन में यह भावना उत्पन्न हुई होगी शायद ऐसा मेरा मानना है। जैसा कि मैं समझती हूं कि जब हम इन रामायणकालीन नारियों के चरित्र के बारे में अथवा इनके द्वारा किए गए कार्यों के बारे में पढ़ते, देखते अथवा सुनते हैं तो हमारे मन में बहुत सारे ऐसे प्रश्न उठते हैं कि उसने वह कार्य किया ही क्यों जो धर्मसम्मत नहीं था या जिसकी आवश्यकता ही नहीं थी। —डॉ- सांत्वना मिश्रा\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"डॉ- सांत्वना मिश्रा","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":48315529461927,"sku":null,"price":300.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0745\/2131\/3447\/files\/ramkatha.png?v=1775216697"},{"product_id":"भारत-नवनिर्माण-के-सूत्रधार-bharat-navnirman-ke-sutradhar","title":"भारत नवनिर्माण के सूत्रधार (Bharat Navnirman Ke Sutradhar)","description":"","brand":"भारत नवनिर्माण के सूत्रधार","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":48316566470823,"sku":null,"price":400.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0745\/2131\/3447\/files\/navnirman.png?v=1775200621"},{"product_id":"सिख-धर्म-में-भक्ति-के-रंग-sikh-dharam-mein-bhakti-ke-rang","title":"सिख धर्म में भक्ति के रंग (Sikh Dharam Mein Bhakti Ke Rang)","description":"\u003cp\u003e\u003cspan\u003eमानव जीवन की प्राप्ति अकारण नहीं है। संसार में घटित होने वाली प्रत्येक घटना का ईश्वर ने एक विधान निश्चित किया हुआ है। वह अटल और अकाट्य है। चौरासी लाख योनियों में विचरती जीवात्मा का मानव योनि में प्रवेश दुर्लभ संभावनाओं के द्वार अनावृत करता है। परमात्मा ने मात्र मनुष्य को ही चिंतन और उन्नयन की सामर्थ्य से युक्त किया है। वह स्व हित स्वयं अर्जित करने योग्य होता है। सिख धर्म दर्शन ने मानव हित को रेखांकित कर जीवन उद्देश्य के रूप में स्थापित किया। यह उद्देश्य था विभिन्न योनियों में आवागमन से मुक्ति और जीवात्मा का परमात्मा में सम्मिलन। श्री गुरु ग्रंथ साहिब की वाणी जीवन उद्देश्य को स्पष्ट करने वाली और उसे प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त करने वाली है। इसी में जीवन का सुख और गति निहित है। कर्म मनुष्य को करना है किंतु प्राप्ति परमात्मा की कृपा बिना संभव नहीं।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"सत्येन्द्र पाल सिंह","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":48319575130279,"sku":null,"price":350.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0745\/2131\/3447\/files\/bhaktikerang.png?v=1775216384"},{"product_id":"शक्ति-कणों-की-लीला-shakti-kanon-ki-leela-spirituality","title":"शक्ति कणों की लीला (Shakti Kanon Ki Leela) Spirituality","description":"\u003cdiv\u003eअमृता प्रीतम द्वारा लिखित 'शक्ति कणों की लीला'\u003cspan\u003e एक अनूठी आध्यात्मिक पुस्तक है जो ईश्वर, आत्मा और जीवन के गूढ़ रहस्यों पर केंद्रित है। यह पुस्तक पाठकों को आध्यात्मिकता, आत्म-ज्ञान और जीवन के लक्ष्यों को समझने में मदद करती है, जिसे अक्सर आध्यात्मिक जिज्ञासुओं के लिए एक वरदान माना जाता है\u003c\/span\u003e\u003cspan\u003e। \u003c\/span\u003e\n\u003c\/div\u003e\n\u003cdiv\u003e\n\u003cspan\u003eयह आध्यात्मिक कहानियों या विचारों का एक संग्रह है, जो पाठकों को आत्म-चिंतन के लिए प्रेरित करती है\u003c\/span\u003e\u003cspan\u003e।\u003c\/span\u003e\n\u003c\/div\u003e","brand":"अमृता प्रीतम","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":48332499124391,"sku":null,"price":150.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0745\/2131\/3447\/files\/shakti.png?v=1775379071"},{"product_id":"अज्ञात-का-निमंत्रण-agyaat-ka-nimantran-spirituality","title":"अज्ञात का निमंत्रण (Agyaat Ka Nimantran) Spirituality","description":"\u003cp\u003e\u003cspan\u003e'अज्ञात का निमंत्रण\u003c\/span\u003e\u003cspan\u003e' प्रसिद्ध लेखिका अमृता प्रीतम \u003c\/span\u003e\u003cspan\u003eद्वारा रचित एक महत्वपूर्ण साहित्यिक कृति है, जो मूल रूप से हिंदी\/पंजाबी में लिखी गई है। यह पुस्तक मुख्य रूप से \u003c\/span\u003e\u003cspan class=\"gmail-Yjhzub\"\u003eआध्यात्मिक सत्य कथाओं\u003c\/span\u003e\u003cspan\u003e और जीवन के गूढ़ रहस्यों पर आधारित है। किताबघर प्रकाशन द्वारा प्रकाशित, यह पुस्तक पाठकों को जीवन के अज्ञात पहलुओं के बारे में सोचने पर प्रेरित करती है।\u003c\/span\u003e\u003cspan class=\"gmail-uJ19be gmail-notranslate\"\u003e\u003cspan class=\"gmail-vKEkVd\"\u003e\u003cspan aria-hidden=\"true\"\u003e \u003c\/span\u003e\u003c\/span\u003e\u003c\/span\u003e\u003cspan\u003eयह पुस्तक जीवन, मृत्यु, अज्ञात (unknown) और अस्तित्व के दार्शनिक प्रश्नों की खोज करती है।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"अमृता प्रीतम","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":48332586975399,"sku":null,"price":220.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0745\/2131\/3447\/files\/agyat.png?v=1775380887"},{"product_id":"सितारों-के-संकेत-sitaron-ke-sanket-memoir-spirituality","title":"सितारों के संकेत (Sitaron Ke Sanket) Memoir, spirituality","description":"\u003cdiv\u003e\u003cspan\u003eअमृता प्रीतम अपने सपनों पर बहुत विश्वास करती थी .क्यों कि उनके देखे सपने उन्हें कोई न कोई अर्थ दे जाते थे | उनके सपनो की व्यख्या समय समय पर ज्योतिष आचार्य श्री राज जी ने अमृता से मिलने पर की थी |उनके इन्हों सपनो का लेखा जोखा उनकी किताब \u003cstrong\u003eसितारों के संकेत\u003c\/strong\u003e में लिखा गया है उन्हीं सपनों में एक सपना का विश्लेषण उनकी और साहिर के बारे में भी है जब राज जी ने कहा कि आपने आपके सितारों की भाषा देख कर आपका और साहिर साहब के आत्मिक सम्बन्ध देख कर बता सकता हूँ ..अमृता ने कोई जवाब नहीं दिया पर एक नज़्म की एक पंक्ति उनके बंद होठों में आ गयी ..मान सुच्चे इश्क दा है ,हुनर दा दावा नहीं ….राज जी ने आगे बताया कि आपका जन्म भी कर्क लग्न का है और साहिर साहब का भी जन्म कर्क लग्न का है इसलिए आपके आत्म स्थान का मालिक भी मंगल है और साहिर जी का भी |यही मंगल ही कारण बना आपके और उनके आत्मिक सम्बन्ध का और मंगल ही वह कारण बना जिसने आपके सम्बन्ध को कोई सूरत अख्तियार नहीं करने दी….\u003c\/span\u003e\u003c\/div\u003e","brand":"अमृता प्रीतम","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":48332762415271,"sku":null,"price":200.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0745\/2131\/3447\/files\/sanket.png?v=1775384380"},{"product_id":"सितारों-के-अक्षर-और-किरणों-की-भाषा-sitaron-ke-akshar-or-kiranon-ki-bhasha-memoir-spirituality","title":"सितारों के अक्षर और किरणों की भाषा (Sitaron Ke Akshar or Kiranon Ki Bhasha) Memoir, spirituality","description":"\u003cp\u003e'सितारों के अक्षर और किरणों की भाषा' प्रसिद्ध भारतीय लेखिका अमृता प्रीतम\u003cspan\u003e द्वारा लिखित हिंदी\/पंजाबी पुस्तक है, जो ज्योतिष, भविष्यवाणी, सपनों और आध्यात्मिक विषयों पर 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रूहानी यात्रा और स्वयं के अस्तित्व की खोज के बारे में लिखा है।\u003c\/span\u003e\u003cspan class=\"gmail-uJ19be gmail-notranslate\"\u003e\u003cspan class=\"gmail-vKEkVd\"\u003e\u003cspan aria-hidden=\"true\"\u003e \u003c\/span\u003e\u003c\/span\u003e\u003c\/span\u003e\u003cspan\u003e'\u003c\/span\u003e\u003cspan\u003eरसीदी टिकट\u003c\/span\u003e\u003cspan\u003e' के बाद, यह उनके जीवन का अगला पड़ाव है, जो बाहरी दुनिया से ज्यादा आंतरिक दुनिया (अंतर्चेतना) पर केंद्रित है। इसमें उन्होंने अपने बचपन, मौत के साये, विभाजन का दर्द, और जीवन के प्रति आध्यात्मिक दृष्टिकोण को कलमबद्ध किया है। यह पुस्तक पाठक को रूहानी और भावनात्मक यात्रा पर ले जाती है, जहाँ अमृता जी ने अपनी चेतना को अक्षरों में ढालने का प्रयास किया है।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"अमृता प्रीतम","offers":[{"title":"Default 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की कालजयी वाणी को नए अर्थों में समझने के लिए यह पुस्तक अवश्य पढ़ें।  \u003c\/p\u003e","brand":"डॉ० गोविन्द रजनीश","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49480742207655,"sku":null,"price":1400.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0745\/2131\/3447\/files\/kabirset.png?v=1778133405"},{"product_id":"नतोऽहं-natoham-novel-in-hindi","title":"नतोऽहं (Natoham) Novel in Hindi","description":"\u003cp\u003eलब्धप्रतिष्ठ रचनाकार मीनाक्षी स्वामी का बहुचर्चित उपन्यास “नतोऽहं\" भारतभूमि के वैभवशाली अतीत और वर्तमान गौरव के सम्मुख विश्व के नतमस्तक होने का साक्षी है। यह भारतीय संस्कृति की बाह्य जगत् से आंतरिक जगत् की विस्मयकारी यात्रा करवाने की सामर्थ्य के अनावरण का अद्भुत परिणाम हे। भारतीय संस्कृति के विराट् वैभव का दर्शन होता है-सांस्कृतिक नगरी उज्जयिनी में बारह वर्षों में होने वाले सिंहस्थ के विश्वस्तरीय आयोजन में। उज्जयिनी का केंद्र शिप्रा है। इसके किनारे होने वाले सिंहस्थ में देश भर के आध्यात्मिक रहस्य और सिद्धियां एकजुट हो जाती हैं। इन्हें देखने, जानने को विश्व भर के जिज्ञासु अपना दृष्टिकोण लिए यहां एकत्र हो जाते हैं। तब इस पवित्र धरती पर मन-प्राण में उपजने वाले सूक्ष्मतमम भावों को सशक्त अभिव्यक्ति है यह उपन्यास। इसमें मंत्रमुग्ध करने वाली भारतीय संस्कृति व सनातन धर्म के सभी पहलुओं पर वैज्ञानिक चिंतन है, भारतीय अध्यात्म के विभिन्न पहलुओं को खरेपन के साथ उकेरा गया है। उज्जयिनी अनवरत सांस्कृतिक प्रवाह की साक्षी हे। यह केवल धर्म नहीं, समूची संस्कृति है, जिसमें कलाएं हैं, साहित्य हे, ज्ञान है, विज्ञान है, आस्था है, परंपरा है और भी बहुत कुछ है। यात्रा वृत्तांत शैली के इस उपन्यास में उज्जयिनी के बहाने भारतीय दर्शन, परंपराओं और संस्कृति की खोज हे जो सुदूर विदेशियों को भी आकर्षित करती है। उज्जयिनी के लोक जीवन की झांकी के साथ भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं का सतत आख्यान है जो पुरा मनीषियों की मेधा का महकता प्रतीक हे। उपन्यास के विलक्षण कथा संसार को कुशल लेखिका ने अपनी लेखनी के संस्पर्श से अनन्य बना दिया है। नायक एल्विस के साथ पाठक शिप्रा के प्रवाह में प्रवाहित होता है, डुबकी लगाता है। ‘ भूभल’ जैसे सशक्त उपन्यास से कीर्ति पाने 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