{"title":"कविता-संग्रह (Collection of Poems)","description":"","products":[{"product_id":"मेरी-इक्यावन-कविताएं-meri-ekyavan-kavitayen-poems","title":"मेरी इक्यावन कविताएं (Meri Ekyavan Kavitayen) Poems","description":"\u003cp\u003e\u003cspan\u003eवज्र से भी कठोर अडिग संकल्प-सम्पन्न राजनेता श्री अटल बिहारी वाजपेयी के कुसुम कोमल हृदय से उमड़ पड़ने वाली कविताएँ गिरि-हृदय से फूट निकलने वाली निर्झरियों के सदृश एक ओर जहाँ अपने दुर्दान्त आवेग से किसी भी अवगाहनकर्ता को बहा ले जाने में समर्थ हैं, वहीं दूसरी ओर वे अपनी निर्मलता, शीतलता और प्राणवत्ता से जीवन के दुर्गम पथ के राहियों की प्यास और थकान को हरकर नई प्रेरणा की संजीवनी प्रदान करने की क्षमता से भी सम्पन्न हैं। इनका सहज स्वर तो देशभक्तिपूर्ण शौर्य का ही है; किन्तु कभी-कभी नव सर्जना की वेदना से ओतप्रोत करुणा की रागिनी को भी ये ध्वनित करती हैं। -विष्णुकान्त शास्त्री\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"अटल बिहारी वाजपेयी","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":48171166138535,"sku":null,"price":315.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0745\/2131\/3447\/files\/atal.png?v=1774076176"},{"product_id":"श्रीप्रकाश-शुक्ल-कवि-ने-कहा-shriprakash-shukla-kavi-ne-kaha-poems","title":"श्रीप्रकाश शुक्ल : कवि ने कहा \/ Shriprakash Shukla : Kavi Ne kaha (Poems)","description":"\u003cp\u003e\u003cspan\u003eश्रीप्रकाश शुक्ल हिंदी कविता के प्रतिष्ठित कवि हैं। इनके पहले कविता संग्रह ‘अपनी तरह के लोग’ (1999) से लेकर पाँचवें कविता संग्रह ‘ओरहन और अन्य कविताएँ’ (2014) तक की कविताओं से गुजरकर कविता प्रेमियों को काव्य स्वाद का सुखद अहसास होता है। अपनी कविताओं में ये बिना किसी नारेबाजी व आयातित विमर्श का हौवा खड़ा किए सधे हुए स्वर में सामाजिक विसंगतियों, क्रूरताओं, धार्मिक ढकोसलों, आर्थिक पराभवों और सांस्कृतिक क्षरण पर सीधे वार करते हैं। इनकी कविता की दुनिया में राजनीति व विचारधारा की एक पक्षधर दुनिया गुँथी हुई होती है जिसमें गरीब, पीड़ित व उपेक्षित वर्ग के प्रति गहरी रागात्मक चेतना मौजूद है। लेकिन उपर्युक्त बातों के साथ-साथ जिस वैशिष्ट्य के कारण श्रीप्रकाश शुक्ल हिंदी कविता में ज्यादा चर्चित हैं वह हैं इनकी विषयगत वैविध्यता और गहरी लोकोन्मुखता। अपनी कविताओं में वे महज लोक का चित्रण नहीं करते बल्कि लोक के क्षरण के कारणों की शिनाख्त भी करते हैं। नवउदारवाद और पूँजीवादी शक्तियों के आक्रमण, दमन, शोषण और चालाकियों का प्रतिरोध करने वाली इनकी कविता जनोन्मुखी व लोकोन्मुखी तो है ही, इसमें स्थानीयता के साथ वैश्विकता के तत्त्व भी समाहित हैं जहाँ पुराने के साथ परंपरा से रिश्ते रखने वाला नया समाज तो है ही, एक आधुनिक चेतना भी मौजूद है। इसी के साथ गौरतलब है कि प्रकृति, प्रेम और सौंदर्य के चित्रों से भरपूर कवि का कविता संसार विविध वर्णों से युक्त है जहाँ कविता की धार अपनी भाषिक व्यंजना के रेडिकल भावभूमि पर विकसित होती है। यहाँ कहते हुए ख़ुशी होती है कि इस कवि ने अपने को कहीं रिपीट नहीं किया है और इसी कारण इनकी कविता बहुवस्तुस्पर्शी उध्र्वमुखी चेतना से संपन्न है जो एक समर्थ कवि का लक्षण है। भाषा की सादगी और बिंबों की निजता इनके कवि- स्वभाव की विलक्षण विशेषता है। कह सकते हैं कि भाषा के लोक स्वीकृत विन्यास को चुनौती देती इनकी कविताओं में व्यंग्य व वक्रता का एक सघन संसार उपस्थित होता है जहाँ भाषायी मुखरता के साथ एक आत्मसंवादी स्वर का औदात्य भी मिलता है जो इनकी कविताओं को रेडिकल बनाता है। उम्मीद की जानी चाहिए कि कविता का यह संचयन कवि की काव्य संपदा और उनकी सामर्थ्य से अपने पाठकों को परिचित कराने में समर्थ होगा।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"श्रीप्रकाश शुक्ल","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":48182344286375,"sku":null,"price":195.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0745\/2131\/3447\/files\/shriprakash.png?v=1774248133"},{"product_id":"नीलेश-रघुवंशी-कवि-ने-कहा-neelesh-raghuvanshi-kavi-ne-kaha-poems","title":"नीलेश रघुवंशी : कवि ने कहा \/ Neelesh Raghuvanshi : Kavi Ne kaha (Poems)","description":"\u003cp\u003e\u003cspan\u003eजीने की उष्मा और ललक से भरी ये कविताएँ समकालीन कविता में नीलेश की नई पहचान को रेखांकित करती हैं। ‘पहली रुलाई तक की डायरी’ जैविक स्त्री-बोध का क्रमिक दस्तावेज है, जो शायद हिंदी में पहली बार इतनी प्रामाणिकता के साथ दर्ज हुआ है। इस काव्यात्मक डायरी को जो बात सबसे अधिक विश्वसनीय बनाती है, वह अजन्मे शिशु के साथ माँ की वह चुहल है, जो प्रायः इसके हर टुकड़े में मिल जाएगी। ‘जन्म देना एक यातना से गुजरना है’µइस पंक्ति को लिखने वाली यह कवयित्री ही यह क्रीड़ाभरी पंक्ति भी लिख सकती हैµ‘मैं लिख रही हूँ डायरी और तुम बंदर बने हुए होµतुमने तो मेरे पेट को खेल का मैदान बना रखा है।’ जन्म देने के सर्जनात्मक उल्लास से भरी ये कविताएँ समकालीन कविता में कुछ नया जोड़ती हैं। -केदारनाथ सिंह\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"नीलेश रघुवंशी","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":48182368305319,"sku":null,"price":195.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0745\/2131\/3447\/files\/anamika.png?v=1774249029"},{"product_id":"जितेन्द्र-श्रीवास्तव-कवि-ने-कहा-jitendra-shrivastva-kavi-ne-kaha-poems","title":"जितेन्द्र श्रीवास्तव : कवि ने कहा \/ Jitendra Shrivastva : Kavi Ne kaha (Poems)","description":"\u003cp\u003e\u003cspan\u003eपिछली सदी के आखिरी दशक में एक धमक की तरह काव्य-परिदृश्य पर उपस्थित हुए कवि जितेन्द्र श्रीवास्तव आज नयी सदी की कविता के सर्वाधिक प्रशंसित और अनिवार्य कवि हैं। बाजारू प्रलोभनों से बचाकर हिंदी कविता को विश्वसनीय बनाए रखने के प्रति सर्जनात्मक सजगता जितेन्द्र को अपने समकालीनों में अलग पहचान दिलाती है। हमेशा करुणा, प्रेम और उम्मीद का पक्ष लेती हुई जितेन्द्र श्रीवास्तव की कविता अपने आसपास पसरी हुई त्रासदी, अन्याय और दुःख के राजनीतिक तात्पर्यों का साहसिक उद्घाटन भी करती चलती है। जैसा कि होना चाहिए–गहन रूप से राजनीतिक होकर भी जितेन्द्र श्रीवास्तव की कविता अपने स्वभाव में मानवीय, मार्मिक और भावनात्मक रूप से आर्द्र बनी रहती है। जितेन्द्र के लिए, कविता मनुष्य की नैसर्गिक संवेदनाओं को परिमार्जित करने का माध्यम है। मानवीय जिजीविषा के बहुविधि संस्तरों से साक्षात्कार के क्रम में उनकी कविता को कलात्मक मेयार की कठिनतर ऊँचाइयों तक पहुँचते हुए देखा जा सकता है। नयी सदी की कविता के भाषिक और संवेदनात्मक आचरण को उदाहरणीय बनाने में जिन थोड़े कवियों का योगदान है, उनमें जितेन्द्र श्रीवास्तव अलग से ध्यान खींचते हैं। स्त्री, दलित, उत्पीड़ित और मार्जिनलाइज्ड समाज के तमाम अंतरंग जीवन-प्रसंगों से निर्मित जितेन्द्र की कविता का वितान बहुआयामी तो है ही, इसकी हदें इतिहास से लेकर भविष्य के अनिश्चय भरे अँधेरों तक व्याप्त हैं। जहाँ तक विमर्शों का प्रश्न है कविता में कला का सौंदर्य बचाते हुए जितेन्द्र को पूरे काव्यात्मक संतुलन के साथ, विमर्शों में कारगर हस्तक्षेप करते हुए देखा जा सकता है। कविता के प्रति पाठकों की घटती हुई अभिरुचि के प्रतिकूल माहौल में भी जितेन्द्र श्रीवास्तव की कविता अनेक तरह के सांस्कृतिक समूहों और आर्थिक-राजनीतिक रुझानों के पाठकों में समान प्रशंसा और प्रतिष्ठापूर्वक पढ़ी जाती है। उम्मीद की जाती है कि उनकी कविताओं का यह चयन पाठकों की संवेदना को स्पंदित करने में सफल रहेगा।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"जितेन्द्र श्रीवास्तव","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":48182406545575,"sku":null,"price":200.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0745\/2131\/3447\/files\/jitendra.png?v=1774249697"},{"product_id":"केदारनाथ-सिंह-कवि-ने-कहा-kedarnath-singh-kavi-ne-kaha-poems","title":"केदारनाथ सिंह : कवि ने कहा \/ Kedarnath Singh : Kavi Ne kaha (Poems)","description":"\u003cp\u003e\u003cspan\u003eकवि केदारनाथ सिंह के अब तक प्रकाशित संपूर्ण कृतित्व से उनकी प्रतिनिधि कविताओं को छाँट निकालना एक कठिन काम है और चुनौती भरा भी। इस संकलन को तैयार करने में पहली कसौटी मेरी अपनी पसंद ही रही है। पचास वर्षों में फैले कृतित्व में से श्रेष्ठतर को छाँटकर यहाँ प्रस्तुत कर दिया है, ऐसा दावा मेरा बिलकुल नहीं है। हाँ, इतनी कोशिश अवश्य की है कि केदार जी की कविता के जितने रंग है, जितनी भगिमाएँ है उनकी थोडी-बहुत झलक और आस्वाद पाठक को मिल सके…यूँ चयन-दृष्टि का पता तो कविताएँ खुद देंगी ही। कविताओं को चुनने और उन्हें अनुक्रम देने में यह कोशिश जरूर रहीं है कि पाठकों को ऐसा न लगे कि कविताओं को यहाँ किसी विशिष्ट श्रेणीबद्ध क्रम में बाँटकर सजाया गया है। भिन्न भाव बोध, रंग और मूड्स की कविताओं को एक साथ रखकर बस घंघोल भर दिया है-एक निरायासज़न्य सहजता के साथ पाठकों को पढ़ते समय जिससे किसी क्रम विशेष में आबद्ध होकर पढने जैसी प्रतीति न हो, बल्कि तरतीब में बनावटी साज-सज्जा से दूर एक मुक्त विचरण जैसा प्रकृत आस्वाद मिल सके ।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"केदारनाथ सिंह","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":48182457401511,"sku":null,"price":240.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0745\/2131\/3447\/files\/kedarnath.png?v=1774250369"},{"product_id":"कुँवर-नारायण-कवि-ने-कहा-kunwar-narayan-kavi-ne-kaha-poems","title":"कुँवर नारायण : कवि ने कहा \/ Kunwar Narayan : Kavi Ne kaha (Poems)","description":"\u003cp\u003e\u003cspan\u003eशीर्षस्थ कवि कुँवर नारायण की कुछ कविताओं का यह संचयन उनके विस्तृत काव्य-बोध को समझने में सहायक होगा। पिछले पचास-साठ वर्षों में होने वाली महत्त्वपूर्ण गतिविधियों की सूक्ष्म एवं संवेदनशील अभिव्यक्ति इन कविताओं में प्रतिबिंबित हुई है। इस संग्रह में किसी विभाजन के अंतर्गत कविताएँ नहीं चुनी गई हैं, कोशिश है कि ‘आत्मजयी’ एवं ‘वाजश्रवा के बहाने’ को छोड़कर बाकी सभी कविता-संग्रहों में से कुछ कविताएँ रहें। समय और स्थान की निरंतरता का बोध कराती उनकी कविताएँ दूर समयों, जगहों और लोगों के बीच हमें ले जाती हैं। कुँवर नारायण की कविताएँ लंबी और जटिल भारतीय अस्मिता को बहुत कुशलता से आधुनिकता के साथ जोड़कर दोनों को एक नई पहचान देती हैं। उनकी रचनाशीलता में हिंदी भाषा तथा विभिन्न विषय नई तरह सक्रिय दिखाई देते हैं। एक ओर जहाँ वह पारंपरिक भाषा में नई ऊर्जा डालते हैं वहीं बिलकुल आज की भाषा में एक बहुत बड़े विश्वबोध् को संप्रेषित करते हैं-कविता के लिए ज्यादा से ज्यादा जगह बनाते हुए। प्रस्तुत कविताओं का संकलन पाठकों को कई तरह से संतोष देगा।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"कुँवर नारायण","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":48182506553511,"sku":null,"price":240.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0745\/2131\/3447\/files\/kunwar.png?v=1774251555"},{"product_id":"लीलाधर-जगूड़ी-कवि-ने-कहा-leeladhar-jaguri-kavi-ne-kaha-poems","title":"लीलाधर जगूड़ी : कवि ने कहा \/ Leeladhar Jaguri : Kavi Ne kaha (Poems)","description":"\u003cp\u003e\u003cspan\u003eअपनी कविताओं का चुनना आज़ादी है और आज़ादी का पहला लक्षण है चुनाव की स्वतंत्रता जो कि लिखने की स्वतंत्रता से कतई कम महत्त्वपूर्ण नहीं है। कोई अपने लिए क्या और क्यों चुनता है, इसके सामाजिक और व्यक्तिगत कारण हो सकते हैं लेकिन अपने में से अपने को चुनने के लिए ज्ञानात्मक समीक्षा दृष्टि और संयम आवश्यक है जिसका अभाव इस मौके पर भी मुझे काफी परेशान किए रहा। क्या अपनी ये चुनी हुई कविताएँ ही मेरा सम्यक् अभीष्ट हैं? शायद हाँ, शायद नहीं। क्योंकि इस चयन को इस चयन में से अभी पाठकों द्वारा भी चुना जाना है। चुने हुए में से चुनना और बढ़िया विचारपरक हो सकेगा। निर्दोष चयन तो काफी कठिन काम है फिर भी चुनने के स्वार्जित अधिकार से पैदा हुई व्याख्या का अपना स्थान है। वह स्थान तभी दिख सकता है और समझ में आ सकता है जब विवेचन दोष रहित दूषण सहित हो। इन कविताओं में कितना पैनापन है, कितनी प्रखरता है यह तभी समझा जा सकेगा जब सुकोमल और सुंदर पक्षों को उन पात्रों की घटनाओं के माध्यम से चिद्दित किया जा सके। यह अनुभव की महिमा और अनुभूति के विन्यास को खुद अपने अस्तित्व के अनुरूप कारणों से चुनवा सकेगा।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"लीलाधर जगूड़ी","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":48182566944935,"sku":null,"price":125.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0745\/2131\/3447\/files\/jaguri.png?v=1774252607"},{"product_id":"अनामिका-कवि-ने-कहा-anamika-kavi-ne-kaha-poems","title":"अनामिका : कवि ने कहा \/ Anamika : Kavi Ne kaha (Poems)","description":"\u003cp\u003e\u003cspan\u003eअपनी कोमल भावनाओं तथा विवेकशीलता और संवेदनशीलता के कलात्मक संयोजन के कारण अनामिका की कविताएं अलग से पहचानी जाती हैं । स्त्री-विमर्श के इस दौर में स्त्रियों के संघर्ष और शक्ति का चित्रण तो अपनी-अपनी तरह से हो रहा है, लेकिन महादेवी वर्मा ने जिस वेदना और करुणा को अपनी कविता के केंद्र में रखा था, उसका विस्तार केवल अनामिका ही कर पाती हैं । वह सहज ही स्त्री के दु:ख को वंचितजनों के दु:ख से जोड़ लेती हैं । लेकिन ऐसा करते हुए भी भारतीय समाज में पुरुष सत्ता और सामंती संरचना से जूझ रही स्त्रियों के दु:ख और संघर्ष का सरलीकरण या सामान्यीकरण नहीं करती । भारतीय स्त्रियों के जीवन-संघर्ष तथा हास-परिहास और गीत-अनुष्ठान आदि के जरिए पीड़ा को सह पाने की उनकी परंपरागत युक्तिहीन युक्ति के व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखने पर अनामिका की कविताओं के नए अर्थ खुलते हैं, जिन तक कविता को देखने-परखने के रूढ़ ढाँचे को तोड़कर ही पहुंचा जा सकता है । उनकी संवेदना का फैलाव उन वंचित जनों तक है, जिनसे एक स्त्री की करुणा सहज रूप से जुड़ जाती है । लोकभाषा के शब्द उनके यहाँ किसी गुर की तरह नहीं आते, बल्कि वे उनके अनुभव का अनिवार्य हिस्सा हैं । 'जनमतुआ' बच्चे की 'चानी' की तरह 'पुलपुल' कविताओं में परिपक्व कठोरता की विपुल संभावनाएं अंतर्निहित हैं । हिंस्र समय के प्रतिरोध का उनका अपना ढंग है, जो भारतीय स्त्रियों की प्रतिरोध की परंपरा की गहरी समझ और संवेदनात्मक जुड़ाव से उपजा है । समस्याओं और घटनाओं को देखने का उनका दृष्टिकोण एक ऐसी संवेदनशील स्त्री का दृष्टिकोण है, जिसके भीतर अभी भी निष्पाप बचपन बचा हुआ है । संवेदना का यही वह धरातल है, जो हमारे समय से उन्हें विशिष्ट बनाता है ।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"अनामिका","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":48182672654503,"sku":null,"price":195.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0745\/2131\/3447\/files\/anamika_1.png?v=1774253748"},{"product_id":"लीलाधर-मंडलोई-कवि-ने-कहा-leeladhar-mandloi-kavi-ne-kaha-poems","title":"लीलाधर मंडलोई : कवि ने कहा \/ Leeladhar Mandloi : Kavi Ne kaha (Poems)","description":"","brand":"लीलाधर मंडलोई","offers":[{"title":"Default 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Title","offer_id":48332300452007,"sku":null,"price":200.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0745\/2131\/3447\/files\/varjit.png?v=1775375023"},{"product_id":"ख़ामोशी-से-पहले-khamoshi-se-pahle-poems","title":"ख़ामोशी से पहले (Khamoshi Se Pahle) Poems","description":"\u003cp\u003e\u003cspan\u003eअमृता प्रीतम द्वारा रचित 'ख़ामोशी से पहले'\u003c\/span\u003e\u003cspan class=\"gmail-Yjhzub\"\u003e \u003c\/span\u003e\u003cspan\u003eहिंदी साहित्य की एक मार्मिक कृति है, जो यादों, वियोग, और अनकहे जज्बातों की गहराई को दर्शाती है। यह पुस्तक वियोग की स्थिति में रची गई भावनाओं का एक संकलन है, जो पाठकों को आत्म-संवाद और खामोशी के अर्थ से परिचित कराती है।\u003c\/span\u003e\u003cspan class=\"gmail-uJ19be gmail-notranslate\"\u003e\u003cspan class=\"gmail-vKEkVd\"\u003e\u003cspan aria-hidden=\"true\"\u003e \u003c\/span\u003e\u003c\/span\u003e\u003c\/span\u003e\u003cspan\u003eपुस्तक में यादों की नदी, बिछड़न (बिरहा), और मन की गहराई में दबे अक्षरों के सेतु बनाने की भावनाओं को व्यक्त किया गया है। इसमें प्रेम और वियोग की अनुभूतियों को काव्यात्मक और दार्शनिक अंदाज़ में प्रस्तुत किया गया है।\u003c\/span\u003e\u003cspan class=\"gmail-T286Pc\"\u003e यह पुस्तक पाठकों को जीवन की उन अनुभूतियों के करीब लाती है जो शब्दों से परे हैं।\u003c\/span\u003e\u003cspan class=\"gmail-uJ19be gmail-notranslate\"\u003e\u003cspan class=\"gmail-vKEkVd\"\u003e\u003cspan aria-hidden=\"true\"\u003e \u003c\/span\u003e\u003c\/span\u003e\u003c\/span\u003e\u003cspan\u003eअमृता प्रीतम ने इस पुस्तक के माध्यम से वियोगी के मन की आह को एक गान के रूप में पेश किया है, जो पाठक को एक अलग ही दुनिया में ले जाता है।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"अमृता प्रीतम","offers":[{"title":"Default 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